झारखंड हाईकोर्ट से ANM कर्मियों को बड़ी राहत, नियमितीकरण मामले में सरकार और JSSC से जवाब तलब

Meenu | July 4, 2026 | 11:12 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में पिछले 17 से 18 वर्षों से संविदा पर कार्यरत एएनएम (ANM) कर्मियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने नियमितीकरण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम फैसला आने तक किसी भी एएनएम कर्मी को नौकरी से नहीं हटाया जाएगा। साथ ही उनके मासिक वेतन का भुगतान भी नियमित रूप से जारी रहेगा। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अगस्त की तारीख निर्धारित की है। अदालत के इस अंतरिम आदेश से वर्षों से संविदा पर काम कर रहीं स्वास्थ्य कर्मियों को बड़ी राहत मिली है।

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“18 साल सेवा के बाद भी नहीं हुआ नियमितीकरण”

सुनवाई के दौरान एएनएम कर्मियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता समीर सहाय ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि संबंधित स्वास्थ्य कर्मी पिछले 17-18 वर्षों से राज्य के विभिन्न अस्पतालों में लगातार सेवाएं दे रही हैं, लेकिन अब तक उनकी सेवा नियमित नहीं की गई है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि JSSC द्वारा आयोजित नियमित नियुक्ति परीक्षा में इन अनुभवी एएनएम ने हिस्सा लिया था, लेकिन आयोग की ‘नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया’ के कारण वे चयनित नहीं हो सकीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद विभाग इन एएनएम से लगातार काम ले रहा है। ऐसे में उनके लंबे अनुभव और सेवा अवधि को देखते हुए उन्हें सीधे नियमित किया जाना चाहिए।

17 ANM कर्मियों ने दायर की है याचिका

स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से अनुबंध पर कार्यरत कुमारी गायत्री सहित कुल 17 एएनएम कर्मियों ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि नई बहाली करने के बजाय विभाग में कार्यरत संविदा एएनएम कर्मियों के पदों को स्थायी किया जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि कोर्ट के अंतिम निर्णय तक उनकी नौकरी और वेतन दोनों सुरक्षित रहेंगे।

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