शोकॉज के बाद भी एजेंसी को मिला ‘संतोषजनक कार्य’ का सर्टिफिकेट, टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

Meenu | July 2, 2026 | 12:48 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची :रांची सदर अस्पताल की टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति में कथित रूप से विफल रहने वाली वीके ड्रग्स एंड कंपनी को पहले कई नोटिस और शोकॉज जारी किए गए, लेकिन बाद में उसी एजेंसी को ‘संतोषजनक कार्य एवं आचरण’ का अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। आरोप है कि इसी प्रमाण पत्र के आधार पर एजेंसी को अस्पताल में दूसरी दवा की आपूर्ति का नया टेंडर भी मिल गया।

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वैक्सीन की सिर्फ 20% सप्लाई, फिर भी मिला अनुभव प्रमाण पत्र

जानकारी के अनुसार, ई-टेंडर के जरिए एजेंसी को करीब 31 हजार वायल एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति का आदेश मिला था। हालांकि निर्धारित समय में कंपनी ने केवल करीब 3,200 वायल ही उपलब्ध कराए। वैक्सीन की कमी का असर डॉग बाइट के मरीजों पर पड़ा और अस्पताल को दूसरी एजेंसी से दवा खरीदनी पड़ी। इसके बावजूद 29 मई 2026 को एजेंसी को कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर उसके काम और आचरण को संतोषजनक बताया गया।

नोटिस और शोकॉज के बाद कैसे मिली क्लीन चिट?

तारीखघटना / कार्रवाईमुख्य विवरण
16 मार्च 2026सिविल सर्जन का पहला नोटिसएजेंसी को दो दिनों के भीतर एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि आदेश का पालन नहीं होने पर टेंडर की शर्तों के अनुसार कार्रवाई होगी।
25 अप्रैल 2026दूसरा नोटिस जारीसदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने नियमित वैक्सीन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दोबारा नोटिस जारी किया। मरीजों को हो रही परेशानी का उल्लेख करते हुए कारण स्पष्ट करने और कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
12 मई 2026शोकॉज नोटिससिविल सर्जन ने एजेंसी से पूछा कि टेंडर शर्तों के उल्लंघन और निर्धारित मात्रा के मुकाबले केवल लगभग 3,200 वायल की आपूर्ति करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
29 मई 2026कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जारीशोकॉज नोटिस के महज 17 दिन बाद एजेंसी को ‘संतोषजनक कार्य एवं आचरण’ का अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जिसका बाद में नए टेंडर में भी उपयोग किया गया।

अधिकारियों के बयान में भी विरोधाभास

मामले में स्टोर इंचार्ज अनिल कुमार का कहना है कि उन्होंने उपाधीक्षक (डीएस) से चर्चा के बाद ही अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के लिए फाइल आगे बढ़ाई थी। उनके अनुसार, एजेंसी का पिछला रिकॉर्ड अच्छा होने के कारण प्रमाण पत्र देने की बात कही गई थी। वहीं उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं है।

सिविल सर्जन ने क्या कहा?

सिविल सर्जन ने स्वीकार किया कि संबंधित एजेंसी इस बार समय पर वैक्सीन की आपूर्ति नहीं कर सकी थी, इसलिए उसे नोटिस और शोकॉज जारी किया गया था। हालांकि उन्होंने कहा कि कार्य अनुभव प्रमाण पत्र एजेंसी के पिछले वर्षों के संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर जारी किया गया। सिविल सर्जन के अनुसार, कंपनी ने आपूर्ति में देरी के लिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, परिवहन और पैकेजिंग लागत बढ़ने सहित अन्य कारणों का हवाला दिया था। कंपनी का कहना था कि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने के कारण समय पर वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।

टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में एजेंसी के खिलाफ टेंडर शर्तों के उल्लंघन और आपूर्ति में विफलता दर्ज थी, तो उसी अवधि में उसे संतोषजनक कार्य अनुभव प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किया गया। साथ ही, उसी प्रमाण पत्र के आधार पर नए टेंडर में चयन किए जाने से प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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