गढ़वा में वन विभाग की पहल से घटा मानव-हाथी संघर्ष, जंगल में ही मिल रहा पानी और भोजन

Rupa Kumari | June 16, 2026 | 12:58 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, गढ़वा : लंबे समय से जंगली हाथियों की गतिविधियों और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से जूझ रहे गढ़वा जिले में वन विभाग की एक पहल सकारात्मक परिणाम देती दिखाई दे रही है। जंगलों के भीतर पानी और भोजन की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों से वन्यजीवों का रिहायशी इलाकों की ओर रुख कम हुआ है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी दर्ज की गई है।

हाथियों की आवाजाही बनी थी बड़ी चुनौती

गढ़वा जिले के कई वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हाथी, तेंदुआ और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ी हैं। भोजन और पानी की तलाश में जंगली जानवर अक्सर गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते थे, जिससे फसलों, संपत्तियों और मानव जीवन को नुकसान होने की घटनाएं सामने आती थीं। विशेष रूप से जंगली हाथियों की मौजूदगी स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी।

जंगल के भीतर बनाया गया जल स्रोत

वन विभाग ने चिनिया वन क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए जंगल के भीतर ही जल उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की। इसके तहत एक छोटा जलाशय (डैम) विकसित किया गया, ताकि जानवरों को पानी के लिए जंगल से बाहर न आना पड़े। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों में फलदार और उपयोगी पौधों का रोपण भी किया गया, जिससे वन्यजीवों को प्राकृतिक रूप से भोजन उपलब्ध हो सके। वन विभाग के अनुसार, इन प्रयासों के बाद जंगली जानवरों का जंगल के भीतर ही अधिक समय तक रहना देखा जा रहा है। पानी और भोजन की उपलब्धता बढ़ने से उनका आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आना कम हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और स्थानीय लोगों को भी राहत मिली है।

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अन्य क्षेत्रों में भी लागू होगी योजना

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चिनिया वन क्षेत्र में मिले सकारात्मक परिणामों को देखते हुए जिले के अन्य वन क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। योजना के तहत जंगलों के भीतर जल स्रोतों का संरक्षण, नए जलाशयों का निर्माण और वन्यजीवों के लिए भोजन उपलब्ध कराने वाले पौधों का रोपण किया जा रहा है।

संरक्षण और सह-अस्तित्व की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने से मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव कम किया जा सकता है। गढ़वा में वन विभाग की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। यदि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहते हैं, तो भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को और प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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