राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के संकेत? सरयू राय के बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल

Rupa Kumari | June 18, 2026 | 04:09 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों की निगाहें मतगणना और परिणामों पर टिकी हैं। इसी बीच जदयू विधायक सरयू राय के एक बयान ने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी अच्छे अंतर से चुनाव जीतेंगे। मतदान के बाद मीडिया से बातचीत में सरयू राय ने ऐसे संकेत दिए, जिन्हें राजनीतिक विश्लेषक संभावित क्रॉस वोटिंग से जोड़कर देख रहे हैं।

थाली टेढ़ी हो जाए तो वोट ढुलक जाता है

मीडिया से बातचीत के दौरान सरयू राय ने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि गठबंधन के पास जितने वोट हैं, उनमें से कुछ वोट इधर भी आ गए होंगे। अपनी बात को रोचक अंदाज में रखते हुए उन्होंने कहा, “थाली थोड़ा टेढ़ा हो जाता है तो ढुलक जाता है।उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की संभावना के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने किसी दल या विधायक का नाम नहीं लिया। सरयू राय ने आगे कहा कि कुछ विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान किया होगा और ऐसे वोट परिमल नाथवानी के पक्ष में गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यही कारण है कि नाथवानी की जीत लगभग तय नजर आ रही है। उनके इस बयान के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या किसी दल के कुछ विधायकों ने पार्टी निर्देशों से अलग जाकर मतदान किया है। हालांकि इसकी पुष्टि मतगणना के बाद ही हो सकेगी।

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तीन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला

झारखंड राज्यसभा चुनाव में इस बार दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी, कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव कुमार झा (पीके झा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम चुनावी मुकाबले में शामिल हैं। राज्य विधानसभा के सभी 81 विधायकों ने मतदान में हिस्सा लिया। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और अब सभी की नजरें मतगणना पर टिकी हैं।

नतीजों से साफ होगी राजनीतिक तस्वीर

राज्यसभा चुनाव के परिणाम केवल विजेता उम्मीदवारों का ही फैसला नहीं करेंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि विधानसभा में विभिन्न दलों की रणनीति कितनी प्रभावी रही। खासकर क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच परिणामों का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतगणना के बाद सरयू राय का दावा कितना सही साबित होता है और राज्यसभा की दोनों सीटों पर किसे जीत मिलती है।

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