अमड़ापाड़ा कोल माइंस विस्थापितों का DC कार्यालय के सामने धरना, मुआवजा और नौकरी की मांग

Rupa Kumari | June 5, 2026

Samachar Post रिपोर्टर, पाकुड़ : झारखंड के पाकुड़ जिले में अमड़ापाड़ा कोल माइंस से प्रभावित आदिवासी विस्थापितों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। मुआवजा, नौकरी और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर दर्जनों ग्रामीणों ने समाहरणालय (DC ऑफिस) के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

2008 से लंबित हैं मुआवजा और सुविधाएं

धरने पर बैठे ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2008 से उन्हें लगातार आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। विस्थापितों का कहना है कि कोल कंपनी द्वारा जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही खनन कार्य जारी है, जिससे कई गांव उजड़ चुके हैं। प्रभावित ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी बिना वैध जमीन अधिग्रहण के ही कोयला उत्खनन कर रही है और स्थानीय लोगों को उनके घरों से विस्थापित किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

यह भी पढ़ें: झारखंड के 13 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, आंधी-तूफान और वज्रपात की चेतावनी

चार गुना मुआवजा और नौकरी की मांग

विस्थापितों में शामिल मोहन मुर्मू ने कहा कि उनकी मुख्य मांग है कि जमीन के बदले चार गुना मुआवजा दिया जाए, जो प्रति एकड़ लगभग 1.16 करोड़ रुपये बनता है। इसके साथ ही हर प्रभावित परिवार से कम से कम एक सदस्य को नौकरी देने की मांग भी की जा रही है। एक अन्य विस्थापित रामलाल हांसदा ने आरोप लगाया कि कंपनी और प्रशासन द्वारा कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन आज तक न तो मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था हुई।

अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और कोल कंपनी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अब वे “आर-पार की लड़ाई” के मूड में हैं। धरना स्थल पर ग्रामीणों की बड़ी संख्या मौजूद है और स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

Share this news

संबंधित खबरें