अवैध वाहन नीलामी मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- समाधान में देरी क्यों

Rupa Kumari | May 13, 2026 | 02:20 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड में अवैध खनन से जुड़े वाहनों की नीलामी मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सरकार से सवाल किया कि जब मामले का समाधान किया जाना चाहिए था, तब इसमें इतनी देरी क्यों हो रही है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मामले में एक महीने का समय मांगा गया, जिस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला

मामला अवैध खनन परिवहन के दौरान पकड़े गए एक हाइवा वाहन की नीलामी से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार याचिकाकर्ता अशोक सिंह का हाइवा पहले बिहार के गया जिले से चोरी हो गया था, जिसकी प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। बाद में यही वाहन लातेहार जिले के बालूमाथ क्षेत्र में अवैध खनन परिवहन के दौरान जब्त किया गया। आरोप है कि वाहन की नीलामी जल्दबाजी में कर दी गई और उसे कम कीमत पर तीसरे पक्ष को बेच दिया गया, जबकि मामले से जुड़ी रिवीजन याचिका लंबित थी।

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तत्कालीन डीसी से भी कोर्ट ने मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे पूछा कि यदि समस्या उनके कार्यकाल में उत्पन्न हुई थी, तो अब तक उसका समाधान क्यों नहीं निकाला गया। मौजूदा लातेहार डीसी संदीप कुमार भी अदालत में मौजूद रहे। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

मुख्य सचिव को भी देखने को कहा मामला

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को भी इस पूरे मामले पर नजर डालने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार को एक महीने का समय देते हुए कहा है कि वह इस मामले में ठोस समाधान प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई अब 17 जून को होगी।

पारदर्शिता और अधिकारों पर उठे सवाल

अदालत की टिप्पणी से साफ है कि मामला सिर्फ एक वाहन की नीलामी तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता, जवाबदेही और आम लोगों के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। यदि किसी व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना उसकी संपत्ति की नीलामी कर दी जाए, तो यह गंभीर कानूनी सवाल खड़ा करता है। अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।

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