तंगहाली नहीं तोड़ पाई हौसला: मजदूर की बेटी गीता गोराई ने 97.2% लाकर किया कमाल, इंजीनियर बनने का सपना

Rupa Kumari | April 24, 2026 | 02:23 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, पूर्वी सिंहभूम: अभावों और संघर्ष के बीच पली-बढ़ी गीता गोराई ने झारखंड अकादमिक परिषद की मैट्रिक परीक्षा में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल कर पूर्वी सिंहभूम जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जमशेदपुर के सोनारी रामनगर स्थित भारत सेवा श्रम संघ प्राणवानंद विद्या मंदिर हाई स्कूल की छात्रा गीता को कुल 486 अंक मिले हैं। उनकी सफलता संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल बनकर सामने आई है।

मसाला गोदाम में मजदूरी करते हैं पिता

गीता के पिता अजीत गोराई पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक मसाला गोदाम में पैकिंग का काम करते हैं, जबकि मां खोमा गोराई सिलाई-बुनाई कर परिवार का सहयोग करती हैं। सीमित आय के कारण माता-पिता पढ़ाई का पूरा खर्च नहीं उठा सके। ऐसे में गीता जमशेदपुर के सोनारी में अपनी नानी कमला गोराई के घर रहकर पढ़ाई करती रही।

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नानी ने संभाली पढ़ाई की जिम्मेदारी

बचपन से ही नानी कमला गोराई ने गीता को संभाला। नाना के निधन के बाद घर की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो गई, लेकिन नानी ने शादी-पार्टी में बर्तन भाड़े पर देकर जो भी आय होती, उसी से पोती की पढ़ाई जारी रखी। कठिन हालात के बावजूद गीता ने पढ़ाई से समझौता नहीं किया। दो कमरों के छोटे से घर में रहने के बावजूद गीता की दिनचर्या बेहद अनुशासित रही। सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई, फिर स्कूल और ट्यूशन के बाद घर के काम में हाथ बंटाना उनकी आदत रही। पढ़ाई के साथ-साथ वे नृत्य, संगीत, चित्रकला और खेलकूद में भी सक्रिय रही हैं और स्कूल स्तर पर कई पुरस्कार जीत चुकी हैं।

इंजीनियरिंग करने का सपना, सरकार से मदद की उम्मीद

गीता आगे प्लस टू में प्योर साइंस लेकर पढ़ाई करना चाहती हैं और इंजीनियर बनना उनका लक्ष्य है। हालांकि आर्थिक स्थिति बड़ी चुनौती बनी हुई है। गीता ने सरकार से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि मदद मिलने पर वे अपने सपनों को जरूर साकार करेंगी और राज्य का नाम रोशन करेंगी। गीता की सफलता यह दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।

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