कांकू में प्रस्तावित पत्थर खदान के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध, DC से खनन प्रक्रिया रोकने की मांग

Rupa Kumari | June 12, 2026 | 04:21 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, पूर्वी सिंहभूम : पटमदा प्रखंड की ओड़िया पंचायत स्थित कांकू गांव में प्रस्तावित पत्थर खदान को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को आवेदन सौंपकर खनन परियोजना पर तत्काल रोक लगाने और स्वीकृति प्रक्रिया स्थगित करने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, मौजा कांकू में विभिन्न खाता और प्लॉट नंबरों की कुल 5.90 एकड़ भूमि पर पत्थर खदान स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रस्ताव के खिलाफ ग्राम सभा में सर्वसम्मति से विरोध प्रस्ताव पारित किया गया है।

आबादी क्षेत्र के पास खनन का विरोध

ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खनन स्थल गांव के आबादी क्षेत्र के बेहद करीब स्थित है। इसके आसपास आवासीय घरों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्र भी मौजूद हैं। ऐसे में खनन गतिविधियां शुरू होने से स्थानीय लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ग्राम सभा में मौजूद लोगों ने आशंका जताई कि पत्थर खदान से निकलने वाली धूल, विस्फोट और बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने आवेदन में कहा है कि खनन कार्य शुरू होने से आसपास की कृषि भूमि प्रभावित होगी और पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ सकता है। उनका कहना है कि क्षेत्र के अधिकांश परिवार खेती पर निर्भर हैं, ऐसे में खनन से आजीविका पर भी असर पड़ने की संभावना है।

ग्राम सभा की सहमति को बताया जरूरी

ग्रामीणों ने प्रशासन को याद दिलाया कि कांकू गांव अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां विकास या खनन परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा की सहमति का विशेष महत्व है। उनका कहना है कि ग्राम सभा पहले ही प्रस्तावित खदान का विरोध कर चुकी है, इसलिए ग्रामीणों की इच्छा के विरुद्ध परियोजना लागू नहीं की जानी चाहिए।

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प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की है कि ग्राम सभा के निर्णय, जनहित और पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित पत्थर खदान की स्वीकृति प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। आवेदन की प्रतिलिपि जिला खनन पदाधिकारी, धालभूम अनुमंडल पदाधिकारी, पटमदा प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा अंचल अधिकारी को भी भेजी गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि गांव में किसी भी परिस्थिति में पत्थर खदान स्थापित नहीं होने दी जाएगी और इसके खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा।

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