Samachar Post रिपोर्टर,पाकुड़ :पाकुड़ जिले के कल्याण विभाग में 12.38 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले में विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से एसबीआई खाते से अवैध निकासी का आरोप लगाते हुए नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
यह भी पढ़ें :झारखंड में अनाथ बच्चों को 18 साल तक आर्थिक सहायता की मांग, मिथिलेश ठाकुर ने सौंपा मांग पत्र
कैसे खुला मामला
कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार इक्का के अनुसार, 8 दिसंबर को एसबीआई बाजार शाखा, पाकुड़ के प्रबंधक अभिनव कुमार ने सूचना दी कि विभाग की ओर से भेजे गए एक एडवाइस पर किए गए हस्ताक्षर बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं। बैंक पहुंचे कर्मचारी अक्षय रविदास भी संदिग्ध लगे। हस्ताक्षर संदिग्ध पाए जाने पर विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट और कल्याण अधीक्षक मानवेंद्र झा बैंक पहुंचे। बाद में अधीक्षक एडवाइस अपने साथ लेकर दूसरा एडवाइस लाने की बात कहकर निकल गए। इस बीच बैंक प्रबंधक को बताया गया कि अधिकारी आवास चले गए हैं, जिससे बैंक का संदेह और गहरा गया।
फर्जी एडवाइस नष्ट करने की बात स्वीकार
कर्मियों से सख्ती से पूछताछ के बाद, करीब 15 घंटे में कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट ने स्वीकार किया कि संदिग्ध एडवाइस को फाड़कर नष्ट कर दिया गया। इसके बाद बैंक से 1 फरवरी 2025 से अब तक खाते का पूरा विवरण मंगाया गया। विभागीय जांच टीम ने पाया कि कई एडवाइस में पत्र संख्या, तिथि और निर्गत पंजी का मिलान नहीं हो रहा है। इसी आधार पर 12.38 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हुई। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि 1 फरवरी से पहले, तत्कालीन कल्याण पदाधिकारी लक्ष्मण हरिजन के कार्यकाल के दौरान भी फर्जी निकासी के संकेत मिले हैं। बैंक द्वारा भेजे गए 74 एडवाइस में से 7 की तिथि और पंजी मेल नहीं खाते।
स्थानांतरण के बावजूद बैंक पहुंचा कर्मी
जांच में यह भी सामने आया कि अक्षय रविदास का 4 दिसंबर को ही अनुसूचित जनजाति विद्यालय, डूमरचीर में स्थानांतरण हो चुका था, इसके बावजूद वह 8 दिसंबर को एडवाइस लेकर बैंक पहुंचा जिससे साजिश की पुष्टि होती है।
FIR दर्ज की गई
सोची-समझी साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये निकालने के आरोप में कांड संख्या 319/25 दर्ज की गई है। आरोपियों पर बीएनएस की धारा 316(4), 316(5), 318(4), 336(3), 338, 61(2), 3(5) के तहत मामला दर्ज हुआ है।एफआईआर में कार्यालय अधीक्षक मानवेंद्र झा, कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट, अनुसेवक अक्षय रविदास समेत कई खातेदार, लाभुक, फर्म और अन्य व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Reporter | Samachar Post

