21 सितंबर को लगेगा साल 2025 का आखिरी आंशिक सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा

Meenu | September 20, 2025 | 12:10 PM IST

Samachar Post डेस्क, रांची :साल 2025 का आखिरी और दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर (रविवार) की रात को लगेगा। यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जिसकी अवधि कुल 4 घंटे 23 मिनट की रहेगी। ग्रहण रात 11:00 बजे शुरू होगा और 22 सितंबर की रात 3:23 बजे समाप्त होगा।

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भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण

यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह दृश्य केवल दक्षिणी प्रशांत महासागर, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।

आंशिक सूर्य ग्रहण क्या होता है?

जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य का कुछ हिस्सा ढक लेता है, तो उसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इस दौरान सूर्य पूरी तरह नहीं, बल्कि आंशिक रूप से ढका हुआ दिखाई देता है।

ज्योतिषीय प्रभाव और विशेष योग

इस बार का आंशिक सूर्य ग्रहण कन्या राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लग रहा है। साथ ही, सिंह राशि में शुक्र-केतु की युति हो रही है, जिससे भोग-विलास और मानसिक शांति पर असर पड़ सकता है।

सूर्य, चंद्रमा और बुध एक ही राशि में रहेंगे, जिससे मानसिक तनाव और असंतुलन की संभावना बढ़ सकती है।

करीब 30 साल बाद सूर्य और शनि आमने-सामने होंगे, जिससे समसप्तक योग बनेगा।

शनि और मंगल की स्थिति से षडाष्टक योग बनेगा, जिसे अशुभ माना जाता है और यह दुर्घटनाओं व वैचारिक टकराव को जन्म दे सकता है।

किन राशियों पर नकारात्मक असर

इस सूर्य ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव इन 6 राशियों पर पड़ेगा:वृषभ ,कर्क ,कन्या ,धनु , मकर, कुंभ . इन जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

धार्मिक मान्यता और सावधानियां

  • ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, भोजन और मूर्तियों का स्पर्श वर्जित माना गया है।
  • गर्भवती महिलाओं को इस समय खास सावधानी रखनी चाहिए और नुकीले उपकरणों से बचना चाहिए।
  • इस दौरान मंत्र-जाप और ध्यान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि ग्रहण के समय किया गया जप-तप कई गुना फलदायी होता है।
  • ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, घर की सफाई और दान करना शुभ माना जाता है।

122 साल बाद बना दुर्लभ संयोग

इस साल का यह सूर्य ग्रहण खास है क्योंकि पितृपक्ष की शुरुआत और समापन दोनों ही ग्रहणों के बीच हो रहे हैं। ऐसा योग पिछली बार वर्ष 1903 में बना था। यानी 122 साल बाद यह दुर्लभ संयोग देखने को मिलेगा।

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