Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दो सीटों के लिए संभावित रूप से तीन या चार उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्रमुख राजनीतिक दलों के पास अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद वे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से हटकर मतदान की स्थिति बन सकती है। हालांकि, कानून और संवैधानिक प्रावधानों के तहत विधायक को क्रॉस वोटिंग करने से नहीं रोका जा सकता।
बैलेट इलेक्शन एजेंट को दिखाना अनिवार्य
राज्यसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से अलग होती है। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार मतदान करने के बाद विधायक को अपना बैलेट पेपर अपनी पार्टी के अधिकृत इलेक्शन एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है। यदि कोई विधायक बैलेट दिखाए बिना मतपत्र बॉक्स में डालने की कोशिश करता है, तो उसका वोट निरस्त किया जा सकता है। वहीं यदि कोई विधायक अपना मतपत्र अन्य लोगों को दिखाता है, तब भी रिटर्निंग ऑफिसर कार्रवाई कर सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और खरीद-फरोख्त की आशंकाओं को कम करना है।
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हरियाणा के चर्चित ‘पेन कांड’ के बाद बदले नियम
साल 2016 में हरियाणा राज्यसभा चुनाव के दौरान हुए चर्चित ‘पेन कांड’ के बाद निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को और सख्त बनाया था। उस चुनाव में निर्धारित पेन की जगह दूसरे पेन से मतदान होने के कारण कई मत रद्द हो गए थे, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ था। इसके बाद आयोग ने प्रत्येक विधायक को अलग-अलग अधिकृत पेन उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की। अब मतदान के दौरान अधिकारी विधायक को नया पेन देते हैं और मतदान के बाद उसे वापस ले लिया जाता है। झारखंड में भी राज्यसभा चुनाव के दौरान इसी व्यवस्था का पालन किया जाता है।
क्रॉस वोटिंग पर सदस्यता समाप्त नहीं होती
भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत विधानसभा या सदन में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर सदस्यता जा सकती है, लेकिन राज्यसभा चुनाव इसके दायरे में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले कुलदीप नायर बनाम भारत संघ, 2006 में स्पष्ट किया था कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए विधायक को पार्टी से निष्कासित कर सकती है, लेकिन उसकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती।
हाल के चुनावों में भी दिखा क्रॉस वोटिंग का असर
फरवरी 2024 में उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के राज्यसभा चुनावों में भी क्रॉस वोटिंग के मामले सामने आए थे। उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल के कई विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था, जबकि हिमाचल प्रदेश में भी क्रॉस वोटिंग ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि झारखंड में यदि उम्मीदवारों की संख्या सीटों से अधिक होती है, तो क्रॉस वोटिंग चुनाव परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का मुकाबला इस बार बेहद रोचक होने की संभावना है।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।