गिरिडीह में 800 बोरा सरकारी चावल की कथित कालाबाजारी का मामला, ग्रामीणों ने बीच रास्ते में रोका ट्रक

Rupa Kumari | June 6, 2026

Samachar Post रिपोर्टर, गिरिडीह : जिले के जमुआ प्रखंड क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के लिए आवंटित सरकारी चावल की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। भाटडीह स्थित सरकारी चावल गोदाम से लगभग 800 बोरा चावल को कथित रूप से दूसरी जगह भेजे जाने की कोशिश ग्रामीणों की सतर्कता से नाकाम हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय चावल से लदे एक वाहन को संदिग्ध परिस्थितियों में ले जाया जा रहा था। सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर वाहन को बीच रास्ते में रोक लिया और पूरे मामले की जानकारी जनप्रतिनिधियों को दी।

पुलिस ने वाहन को लिया कब्जे में

मामले की सूचना मिलने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और विभागीय अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया। अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर चावल लदे वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। फिलहाल वाहन से जुड़े दस्तावेजों और चावल के परिवहन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि चावल का परिवहन नियमानुसार किया जा रहा था या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।

प्रभावशाली लोगों की भूमिका का आरोप

जमुआ प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि संजीत यादव  ने दावा किया है कि पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। उनका कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई अहम तथ्य और नाम सामने आ सकते हैं। वहीं स्थानीय ग्रामीण बैजू यादव ने आरोप लगाया कि गरीबों के लिए आवंटित अनाज को गलत तरीके से बाजार में खपाने की कोशिश की जा रही थी। उनका कहना है कि यदि ग्रामीण समय पर सतर्क नहीं होते तो बड़ी मात्रा में सरकारी चावल बाहर भेज दिया जाता।

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जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

मामले पर सीएमआर एजेंट मदन मोहन ने भी अपना पक्ष रखा है। हालांकि प्रशासनिक जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चावल का परिवहन वैध प्रक्रिया के तहत किया जा रहा था या सरकारी अनाज की कालाबाजारी की जा रही थी।

जांच पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल अनियमितता नहीं बल्कि गरीबों के लिए निर्धारित राशन की कथित हेराफेरी का गंभीर मामला साबित हो सकता है। जमुआ क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और लोग प्रशासनिक जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

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