Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राजधानी रांची के ऑड्रे हाउस में अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की ओर से “गिनती में आओ: भारत में जनगणना का डाक इतिहास” विषय पर दो दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। यह प्रदर्शनी 5 और 6 जून को आयोजित की जा रही है, जिसमें भारत में जनगणना प्रक्रिया और डाक विभाग की ऐतिहासिक भूमिका को प्रदर्शित किया गया है।
जनगणना संचालन निदेशक ने किया उद्घाटन
प्रदर्शनी का उद्घाटन झारखंड के जनगणना संचालन निदेशक प्रभात कुमार ने किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनगणना के व्यापक प्रचार-प्रसार और समन्वय में डाक विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। प्रदर्शनी में बताया गया है कि डिजिटल तकनीक के आने से पहले भारत में जनगणना को सफल बनाने में डाक विभाग ने अहम भूमिका निभाई थी। डाक सेवा के माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी, जागरूकता और प्रशासनिक समन्वय किया जाता था। इस प्रदर्शनी का संयोजन अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक विकास कुमार द्वारा किया गया है।
यह भी पढ़ें: अमड़ापाड़ा कोल माइंस विस्थापितों का DC कार्यालय के सामने धरना, मुआवजा और नौकरी की मांग
1951 से 2011 तक का दस्तावेजी संग्रह
प्रदर्शनी में 1951 से 2011 तक की अवधि से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज, डाक टिकट, पोस्टकार्ड, प्रथम दिवस आवरण, अंतर्देशीय पत्र और सरकारी अभिलेख प्रदर्शित किए गए हैं। ये सामग्री दर्शाती है कि किस तरह डाक विभाग ने दशकों तक जनगणना अभियान को सफल बनाने में योगदान दिया।
विशेषज्ञों की चर्चा और विचार
उद्घाटन के बाद आयोजित परिचर्चा में शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने जनगणना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि नीति निर्माण और विकास योजनाओं की नींव है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कैसे डाक विभाग ने दूर-दराज के क्षेत्रों तक जनगणना संदेश पहुंचाने और प्रशासनिक समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रदर्शनी इससे पहले जम्मू, बेंगलुरु और लखनऊ में भी आयोजित की जा चुकी है और अब रांची में इसे प्रदर्शित किया गया है।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।