Samachar Post डेस्क, रांची: झारखंड में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट जारी किया है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में सांप काटने के 9,438 मामले सामने आए हैं, जिनमें 63 लोगों की मौत हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को पत्र भेजकर हर स्तर पर सतर्क रहने और जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम रखने का निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि जिन अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध नहीं है, वहां नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों से तत्काल इसकी व्यवस्था की जाए। साथ ही इसकी उपलब्धता की जानकारी ई-औषधि DVDMS पोर्टल पर अपलोड करना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि राज्य स्तर से निगरानी की जा सके। निर्देश के अनुसार जिला अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम का पर्याप्त स्टॉक रखना जरूरी होगा। विभाग का कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है।
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सर्पदंश को घोषित किया गया अधिसूचित रोग
स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश और उससे होने वाली मौतों को पहले ही ‘अधिसूचित रोग’ घोषित कर रखा है। सभी मामलों की रिपोर्टिंग IDSP-IHIP पोर्टल पर अनिवार्य की गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ‘नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेकबाइट एनवेनोमिंग फ्रॉम इंडिया बाय 2030’ भी लागू किया गया है। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता के मामलों में 50 प्रतिशत तक कमी लाना है।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को दी जाएगी ट्रेनिंग
मरीजों के बेहतर इलाज के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल के तहत विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस ट्रेनिंग का मकसद स्वास्थ्यकर्मियों को सर्पदंश के मामलों से निपटने के आधुनिक तरीकों और तय प्रोटोकॉल की जानकारी देना है, ताकि इलाज के दौरान किसी तरह की लापरवाही या चूक न हो सके।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।