जादूगोड़ा यूरेनियम खनन का मामला राष्ट्रपति भवन पहुंचा, झारखंड सरकार से मांगी गई रिपोर्ट

Rupa Kumari | May 7, 2026 | 03:37 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,पूर्वी सिंहभूम : पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा यूरेनियम खनन क्षेत्र से जुड़े स्वास्थ्य, पर्यावरण और विस्थापन के मुद्दे अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी गई याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने झारखंड सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। रामगढ़ निवासी और सरकारी वकील संजीव कुमार अंबष्ठा द्वारा भेजी गई याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। राष्ट्रपति भवन के अवर सचिव लक्ष्मी महारा भूषणम ने झारखंड के मुख्य सचिव को ई-मेल भेजकर मामले में आवश्यक कार्रवाई और रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर गंभीर आरोप

याचिका में जादूगोड़ा और आसपास के इलाकों में यूरेनियम खनन के कारण आदिवासी समुदायों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों का उल्लेख किया गया है। इसमें कैंसर, जन्मजात विकृति, त्वचा रोग, बांझपन और श्वसन संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों की बात कही गई है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि खनन गतिविधियों का असर भूजल, कृषि भूमि और फसलों पर पड़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

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मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की खदानों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और विकिरण सुरक्षा संबंधी जागरूकता नहीं दी जा रही। याचिकाकर्ता ने राष्ट्रपति से जादूगोड़ा क्षेत्र की स्वतंत्र जांच, व्यापक स्वास्थ्य सर्वेक्षण, मुफ्त चिकित्सा सुविधा और पानी व भूमि की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। साथ ही विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और आदिवासी समुदायों के लिए विशेष कल्याण पैकेज लागू करने की भी अपील की गई है। राष्ट्रपति सचिवालय की पहल के बाद अब स्थानीय लोगों की नजरें झारखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। इस मुद्दे ने एक बार फिर जादूगोड़ा में खनन से जुड़े पर्यावरण और स्वास्थ्य संकट को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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