Samachar Post डेस्क, रांची :पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संकेत दिया है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा और आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि फिलहाल केंद्रीय बैंक ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपना रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया का जारी संघर्ष भारत के लिए आर्थिक जोखिम बन सकता है।
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सप्लाई चेन पर असर से बढ़ेगा महंगाई दबाव
गवर्नर ने चेतावनी दी कि अगर तनाव जारी रहता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी। इससे जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता घट सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने ‘सेकंड-राउंड इफेक्ट्स’ का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआती झटका आगे चलकर स्थायी महंगाई का रूप ले सकता है।
पश्चिम एशिया पर भारत की निर्भरता
आरबीआई के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था कई अहम क्षेत्रों में पश्चिम एशिया पर निर्भर है। देश का बड़ा हिस्सा निर्यात और आयात इसी क्षेत्र से जुड़ा है। कच्चे तेल का लगभग आधा आयात यहीं से होता है, जबकि उर्वरक और रेमिटेंस में भी इस क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वहां का कोई भी संकट भारत की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है।
रुपये में गिरावट, लेकिन विदेशी भंडार मजबूत
तनाव बढ़ने के बाद भारतीय रुपये में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि RBI ने भरोसा दिलाया है कि देश के पास लगभग 710 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो 11 महीने से अधिक के आयात के लिए पर्याप्त है। संकट के बीच भारत का डिजिटल भुगतान ढांचा मजबूत बना हुआ है। UPI ने मार्च में 22 अरब ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड बनाया। इसके साथ ही RBI अब ULI पर काम कर रहा है, जिससे किसानों और छोटे कारोबारियों को आसानी से कर्ज मिल सकेगा।
राजकोषीय स्थिति में सुधार
सरकार की वित्तीय स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। 2020-21 में जहां राजकोषीय घाटा 9.2 प्रतिशत था, वहीं 2025-26 में इसके घटकर 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। RBI इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मानता है।
आम लोगों पर क्या होगा असर
अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं और महंगाई का दबाव फिर से बढ़ सकता है। फिलहाल RBI स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप कर सकता है।
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