जमशेदपुर के इंजीनियर अंश त्रिपाठी की तकनीकी सूझबूझ से ‘शिवालिक’ ने पार किया खतरनाक समुद्री रास्ता

Rupa Kumari | March 17, 2026 | 12:03 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच झारखंड के एक युवा इंजीनियर ने साहस और तकनीकी दक्षता की मिसाल पेश की है। जमशेदपुर के अंश त्रिपाठी ने 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी से लदे जहाज ‘शिवालिक’ को दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित पार कराया।

जोखिम भरा सफर, लेकिन मजबूत नेतृत्व

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के इस जहाज में सेकंड इंजीनियर के रूप में तैनात अंश त्रिपाठी पर तकनीकी संचालन की पूरी जिम्मेदारी थी। युद्ध जैसे माहौल में यह मिशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, जहां छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती थी। 13 मार्च को जहाज ने खतरनाक मार्ग पार किया और सुरक्षित रूप से मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया।

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परिवार के लिए भावुक पल

जैसे ही जहाज भारतीय सीमा में पहुंचा और नेटवर्क मिला, अंश ने सबसे पहले अपनी मां चंदा त्रिपाठी को फोन कर अपनी सुरक्षित वापसी की खबर दी। कई दिनों से संपर्क न होने के कारण परिवार चिंता में था, लेकिन इस खबर के बाद घर में खुशी का माहौल लौट आया।

युद्ध के बीच निभाई जिम्मेदारी

इस जहाज पर यूएई, कतर और सऊदी अरब से इंडियन ऑयल के लिए एलपीजी लाई जा रही थी। 27 सदस्यीय क्रू, कैप्टन सुखमीत सिंह के नेतृत्व में काम कर रहा था, लेकिन तकनीकी जिम्मेदारी अंश के कंधों पर थी। उन्होंने हर चुनौती का सामना करते हुए मिशन को सफल बनाया।

परिवार में खुशी का माहौल

जमशेदपुर के पारडीह स्थित उनके घर में अब उत्सव जैसा माहौल है। पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, मां चंदा त्रिपाठी और पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी समेत पूरा परिवार राहत महसूस कर रहा है।

पढ़ाई और करियर

अंश त्रिपाठी शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और कोचीन शिपयार्ड से मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। दिसंबर 2014 से वे शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया से जुड़े हैं और लगातार चुनौतीपूर्ण असाइनमेंट्स का हिस्सा रहे हैं। समंदर की गहराइयों और युद्ध जैसे हालात के बीच अंश त्रिपाठी ने जिस साहस और तकनीकी कौशल का परिचय दिया, वह न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे झारखंड और देश के लिए गर्व की बात है।

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