झारखंड कोचिंग सेंटर विधेयक 2025: छोटे और मध्यम संस्थान आर्थिक दबाव में, ताले लगने का खतरा

Rupa Kumari | September 4, 2025 | 05:05 PM IST
  • नया कानून और कोचिंग संस्थानों की चुनौती

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड विधानसभा ने 26 अगस्त 2025 को झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक पारित किया। छात्र और अभिभावक इस कदम से लाभान्वित हो सकते हैं, लेकिन छोटे और मध्यम कोचिंग संस्थानों के लिए यह कानून भारी चुनौती बन गया है। नए नियमों में रजिस्ट्रेशन शुल्क, दस्तावेजी प्रक्रिया और दंड संबंधी प्रावधान इतने कड़े हैं कि 50 से 150 बच्चों तक पढ़ाने वाले छोटे कोचिंग सेंटरों के लिए आर्थिक बोझ गंभीर हो सकता है।

रजिस्ट्रेशन शुल्क और बैंक गारंटी का बोझ

सबसे बड़ी परेशानी प्रत्येक शाखा के लिए पांच-पांच लाख रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क है। यदि किसी जिले में किसी संस्थान की तीन या चार शाखाएं हैं, तो कुल शुल्क बहुत अधिक हो जाता है। झारखंड में प्रत्येक कोचिंग केंद्र के लिए 5 लाख रुपये की बैंक गारंटी अनिवार्य है, जबकि बिहार और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।

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दंड और रद्दीकरण के कड़े प्रावधान

विधेयक के अनुसार, किसी भी उल्लंघन की पहली बार में 5 लाख, दूसरी बार 10 लाख रुपये का दंड और तीसरी बार रजिस्ट्रेशन रद्द होने का प्रावधान है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दंड बिहार (25,000) और उत्तर प्रदेश (50,000) की तुलना में अत्यधिक है।

प्रशासनिक बोझ और सुविधाओं पर कठोर मानक

झारखंड में न्यूनतम क्षेत्रफल, शिक्षक योग्यता और सुविधाओं के संबंध में नियम केंद्रीय मानकों से भी कठोर हैं। इसके अलावा, प्रत्येक शाखा के लिए अलग रजिस्ट्रेशन शुल्क और बैंक गारंटी जैसी शर्तें छोटे संस्थानों पर असामान्य प्रशासनिक और आर्थिक बोझ डाल रही हैं।

अपीलीय तंत्र और नीति निर्माण में कमी

विधेयक में समीक्षा या अपील का कोई प्रावधान नहीं है। अधिकारियों को अत्यधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे मनमाने फैसले और भ्रष्टाचार का खतरा बढ़ सकता है। झारखंड में कोचिंग एसोसिएशनों को नियामक निकायों में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, जबकि राजस्थान और मध्यप्रदेश में निजी क्षेत्र और हितधारकों को बोर्ड में शामिल किया जाता है।

बच्चों और कोचिंग उद्योग पर संभावित असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि कड़े नियमों और आर्थिक बोझ के कारण झारखंड में कोचिंग का विस्तार ठिठक सकता है। बच्चों को अन्य राज्यों की ओर रुख करना पड़ सकता है या उन्हें ऊंची फीस वाले कॉरपोरेट कोचिंग संस्थानों में प्रवेश लेना पड़ सकता है। वहीं, ऑनलाइन कोचिंग संस्थानों के लिए कोई नियम नहीं होने से केवल ऑफलाइन संस्थान प्रभावित हो सकते हैं।

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