गढ़वा के जंगलों में वन्यजीवों की गणना जारी, बाघ, तेंदुआ, भालू और हाथियों की संख्या का होगा वैज्ञानिक आकलन

Rupa Kumari | August 5, 2026 | 05:11 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, गढ़वा : गढ़वा के घने जंगलों में बाघ, तेंदुआ, भालू, हाथी समेत अन्य वन्यजीवों की वास्तविक संख्या जानने के लिए वन विभाग विशेष अभियान चला रहा है। दक्षिणी वन प्रमंडल की ओर से ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन कार्यक्रम के तहत चरणबद्ध वन्यजीव गणना की जा रही है। अभियान के दो चरण पूरे हो चुके हैं, जबकि तीसरा और अंतिम चरण अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। वन विभाग द्वारा पहले चरण में भंडरिया, बड़गढ़, रंका और दक्षिणी वन प्रमंडल के अन्य वन क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान वनकर्मियों ने जंगलों में वन्यजीवों के पदचिह्न, मल-मूत्र और अन्य जैविक साक्ष्यों को एकत्र किया। इन साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि किन क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियां अधिक हैं और कौन-से इलाके उनके प्रमुख आवास के रूप में उपयोग हो रहे हैं।

संवेदनशील क्षेत्रों में लगाए गए कैमरा ट्रैप

अभियान के दूसरे चरण में जंगल के संवेदनशील और वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में आधुनिक कैमरा ट्रैप लगाए गए। ये स्वचालित कैमरे वन्यजीवों की आवाजाही, व्यवहार और उपस्थिति को रिकॉर्ड कर रहे हैं। कैमरों में कैद तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से बाघ, तेंदुआ, भालू, हाथी तथा अन्य वन्यजीवों की पहचान और संख्या का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाएगा।

अंतिम चरण में डेटा का विश्लेषण

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अभियान के तीसरे चरण में कैमरा ट्रैप से प्राप्त तस्वीरों और आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। विश्लेषण पूरा होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि गढ़वा के जंगलों में विभिन्न वन्यजीवों की वास्तविक संख्या कितनी है। इस प्रक्रिया से न केवल वन्यजीवों की मौजूदगी का सटीक आंकड़ा मिलेगा, बल्कि उनके आवास क्षेत्रों और गतिविधियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।

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संरक्षण रणनीति को मिलेगी मजबूती

वन विभाग का मानना है कि इस गणना अभियान से वन्यजीव संरक्षण योजनाओं को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर वन्यजीवों के आवास संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और जैव विविधता के संरक्षण के लिए नई रणनीतियां तैयार की जा सकेंगी। गढ़वा के जंगल झारखंड के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल हैं और यहां बाघ, तेंदुआ, भालू तथा हाथियों की मौजूदगी पर्यावरणीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यह सर्वेक्षण वन्यजीव संरक्षण के लिए अहम कदम साबित हो सकता है।

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