चार दशक तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहा मिसिर बेसरा, जानिए कौन है ₹1 करोड़ का इनामी माओवादी नेता

Rupa Kumari | July 29, 2026 | 12:02 PM IST

Samachar Post डेस्क, रांची : झारखंड, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल के जंगलों में करीब चार दशकों तक सक्रिय रहे शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ₹1 करोड़ के इनामी इस माओवादी नेता को उसके सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया गया है। हालांकि गिरफ्तारी को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। यदि गिरफ्तारी की पुष्टि होती है, तो इसे पूर्वी भारत में माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था और उस पर कई राज्यों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।

छात्र जीवन से माओवादी संगठन तक का सफर

मिसिर बेसरा का वास्तविक नाम भास्कर बेसरा बताया जाता है। वह झारखंड के गिरिडीह जिले का निवासी है। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उसने धनबाद के पी.के. रॉय मेमोरियल कॉलेज में पढ़ाई की। छात्र जीवन के दौरान वह वामपंथी उग्र विचारधारा से प्रभावित हुआ और धीरे-धीरे भूमिगत गतिविधियों से जुड़ गया। बताया जाता है कि 1980 के दशक में उसने हथियारबंद आंदोलन का रास्ता चुना और फिर कभी मुख्यधारा के जीवन में वापस नहीं लौटा। समय के साथ वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल हो गया और भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य के रूप में उभरा।

माओवादी रणनीति का प्रमुख चेहरा

सुरक्षा एजेंसियां मिसिर बेसरा को केवल एक कमांडर नहीं, बल्कि संगठन का प्रमुख रणनीतिकार मानती रही हैं। उस पर गुरिल्ला युद्ध की योजना बनाने, नए ठिकाने विकसित करने, हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित करने, विस्फोटक नेटवर्क तैयार करने और नए कैडरों को प्रशिक्षित करने का आरोप रहा है। झारखंड के कोल्हान, सारंडा, पोड़ाहाट और सीमावर्ती जंगलों में हुई कई बड़ी माओवादी गतिविधियों के पीछे उसका नाम सामने आता रहा है।

गिरफ्तारी और फिर फरारी की कहानी

साल 2007 में सुरक्षा एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार किया था। लेकिन 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर माओवादियों के हमले के दौरान वह पुलिस हिरासत से फरार हो गया। इसके बाद उसने कई वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दिया। झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में उसकी तलाश के लिए लगातार अभियान चलाए गए, लेकिन वह गिरफ्तारी से बचता रहा।

कोल्हान और सारंडा बना था सबसे बड़ा ठिकाना

पिछले कई वर्षों से पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा और कोल्हान क्षेत्र उसका प्रमुख संचालन क्षेत्र माना जाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार यहां भूमिगत बंकर, हथियारों के भंडार, संचार तंत्र और प्रशिक्षण शिविर संचालित किए जाते थे। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाकर कई बंकर ध्वस्त किए, बड़ी संख्या में आईईडी बरामद किए और हथियारों का जखीरा नष्ट किया। इन अभियानों का असर संगठन की गतिविधियों पर भी देखने को मिला।

धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया नेटवर्क

एक समय ऐसा था जब मिसिर बेसरा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में सशस्त्र माओवादी सक्रिय बताए जाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई शीर्ष कमांडरों के मारे जाने, आत्मसमर्पण और लगातार सुरक्षा अभियानों के कारण संगठन की पकड़ कमजोर होती गई। लेवी वसूली के नेटवर्क पर कार्रवाई, हथियार आपूर्ति में बाधा और स्थानीय समर्थन में कमी ने भी संगठन को प्रभावित किया। सुरक्षा एजेंसियों का दबाव बढ़ने के साथ नेतृत्व और संसाधनों का संकट भी गहराता गया।

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कई राज्यों में दर्ज हैं गंभीर मामले

मिसिर बेसरा पर हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, विस्फोट, रंगदारी, लेवी वसूली, अपहरण और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े अनेक मामले दर्ज बताए जाते हैं। इसी कारण उस पर ₹1 करोड़ का इनाम घोषित किया गया था, जो उसे देश के सबसे अधिक इनामी माओवादी नेताओं में शामिल करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूछताछ के दौरान संगठन की संरचना, हथियारों के नेटवर्क, आर्थिक स्रोतों और अन्य संचालन संबंधी जानकारियां सामने आती हैं, तो सुरक्षा एजेंसियों को नक्सल विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण बढ़त मिल सकती है। हालांकि, गिरफ्तारी से जुड़े सभी दावों और आगे की कार्रवाई को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। इसके बावजूद इस घटनाक्रम को झारखंड और पूर्वी भारत में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

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