CJP आंदोलन को राजद का समर्थन, केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

Rupa Kumari | July 24, 2026 | 04:02 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी नेताओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आंदोलन को और व्यापक बनाने की बात कही है। राजद के वरिष्ठ नेता गौतम सागर राणा ने कहा कि देश में युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान परिस्थितियां 1974 के जेपी आंदोलन की याद दिलाती हैं और आने वाले समय में उससे भी बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि 1974 में गुजरात से शुरू हुआ छात्र आंदोलन बिहार होते हुए पूरे देश में फैल गया था। आज भी छात्रों और युवाओं के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर नाराजगी है, जिसके कारण आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल

गौतम सागर राणा ने कहा कि देश में शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे युवाओं का भरोसा प्रभावित हो रहा है।उन्होंने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

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शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

राजद नेता ने कहा कि यदि परीक्षा संबंधी मामलों को गंभीरता से लिया जाना है तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन को कमजोर करने के बजाय भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। इस मौके पर राजद नेता कैलाश यादव ने भी CJP आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

राजनीतिक माहौल हुआ गर्म

CJP आंदोलन को विपक्षी दलों का समर्थन मिलने के बाद झारखंड सहित कई राज्यों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और विपक्षी दलों की ओर से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है। फिलहाल, आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है।

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