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राज्यसभा चुनाव में कैसे हार सकता है ज्यादा प्रथम वरीयता वोट पाने वाला उम्मीदवार?

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Samachar Post डेस्क, रांची : झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। यदि मैदान में दो से अधिक उम्मीदवार उतरते हैं, तो चुनावी गणित और मतगणना प्रक्रिया काफी दिलचस्प हो जाती है। राज्यसभा चुनाव में केवल प्रथम वरीयता (First Preference) के वोट ही नहीं, बल्कि द्वितीय और अन्य वरीयता के वोट भी परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि प्रथम वरीयता के अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार भी हार जाता है।

दो उम्मीदवार होने पर नहीं होता मतदान

यदि दो रिक्त सीटों के लिए केवल दो ही उम्मीदवार नामांकन करते हैं, तो मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ती। दोनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं और राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। ऐसे में जीत का कोटा इस फार्मूले से तय होता है।अर्थात किसी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 28 प्रथम वरीयता वोट की आवश्यकता होती है।

तीन उम्मीदवार होने पर बदल जाता है खेल

मान लीजिए तीन उम्मीदवार A, B और C मैदान में हैं। A को 30 प्रथम वरीयता वोट मिले, B को 22 वोट मिले, C को 21 वोट मिले ऐसी स्थिति में A जीत जाता है क्योंकि वह आवश्यक कोटा पार कर चुका है। लेकिन A के अतिरिक्त वोट (Surplus Votes) बेकार नहीं जाते। इन्हें मतपत्रों पर अंकित द्वितीय वरीयता के आधार पर अन्य उम्मीदवारों में बांटा जाता है। यहीं से चुनाव का समीकरण बदलने लगता है। यदि B और C को द्वितीय वरीयता के अधिक वोट मिलते हैं, तो उनके कुल वोट वैल्यू में वृद्धि हो सकती है। राज्यसभा चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली से होता है। इसमें किसी उम्मीदवार के अतिरिक्त वोट या बाहर हुए उम्मीदवार के वोट अगले वरीयता क्रम के आधार पर स्थानांतरित किए जाते हैं। इस वजह से केवल प्रथम वरीयता वोट पर्याप्त नहीं होते। यदि किसी उम्मीदवार को दूसरे और तीसरे वरीयता के वोट अधिक मिलते हैं, तो वह मतगणना के अगले चरण में बढ़त हासिल कर सकता है।

चार उम्मीदवार होने पर और बढ़ जाती है जटिलता

यदि मैदान में A, B, C और D चार उम्मीदवार हों, तो सबसे कम वोट पाने वाला उम्मीदवार पहले बाहर हो जाता है। उसके वोट भी मतपत्र पर दर्ज अगली वरीयता के आधार पर अन्य उम्मीदवारों में ट्रांसफर किए जाते हैं। मान लीजिए D सबसे पीछे है और उसके अधिकांश समर्थकों ने C को दूसरी वरीयता दी है। ऐसी स्थिति में C को अतिरिक्त वोट वैल्यू मिल सकती है और वह B को पीछे छोड़ सकता है।

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इसलिए बदल सकता है परिणाम

राज्यसभा चुनाव की मतगणना में केवल यह नहीं देखा जाता कि किसे सबसे ज्यादा प्रथम वरीयता वोट मिले हैं। यह भी देखा जाता है कि:अतिरिक्त वोट किसे ट्रांसफर हो रहे हैं। बाहर हुए उम्मीदवारों के वोट किसे मिल रहे हैं। द्वितीय और तृतीय वरीयता का समर्थन किसके पक्ष में है। इसी कारण कई बार शुरुआती बढ़त रखने वाला उम्मीदवार भी अंततः हार सकता है, जबकि कम प्रथम वरीयता वोट पाने वाला उम्मीदवार वरीयता मतों के हस्तांतरण से जीत दर्ज कर सकता है। राज्यसभा चुनाव की यही विशेष व्यवस्था इसे सामान्य प्रत्यक्ष चुनावों से अलग और अधिक रणनीतिक बनाती है।

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Rupa Kumari

Reporter | Samachar Postमैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।See Profile

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