Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राजधानी रांची के होटल रमाडा में आयोजित तीन दिवसीय 5वें Pedicon 2026 सम्मेलन का समापन हो गया। सम्मेलन में देशभर से करीब 200 बाल रोग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारियों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और बाल चिकित्सा के क्षेत्र में सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा की। सम्मेलन का उद्देश्य बाल चिकित्सा से जुड़ी नई जानकारियों और उपचार तकनीकों को साझा करना रहा। राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने व्याख्यान, केस आधारित चर्चा और अपने अनुभवों के माध्यम से युवा डॉक्टरों को कई महत्वपूर्ण चिकित्सकीय पहलुओं की जानकारी दी।
देशभर के विशेषज्ञों ने बाल चिकित्सा पर साझा की जानकारी
सम्मेलन में रांची समेत झारखंड के कई अनुभवी चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने भी हिस्सा लिया। IAP की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने ‘विकसित भारत के लिए आदर्श बाल रोग विशेषज्ञ’ विषय पर चर्चा की। वहीं फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के डॉ. नीरज अवस्थी ने बच्चों में हृदय रोगों के नवीनतम उपचार की जानकारी साझा की। सम्मेलन में बाल चिकित्सा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने केस स्टडी के माध्यम से चिकित्सकीय अनुभव भी साझा किए।
डेंगू, मिर्गी और निमोनिया पर हुई केस आधारित चर्चा
SVPPGIP, SCB मेडिकल कॉलेज, कटक के प्रोफेसर एवं अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल्ला ने बाल चिकित्सा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी। वहीं सूर्या हॉस्पिटल, मुंबई के डॉ. नील विल्बर कैस्टेलिनो ने बच्चों में डेंगू शॉक के प्रबंधन पर चर्चा की। मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डॉ. कुणाल कालरा ने बच्चों में मिर्गी के मामलों पर केस आधारित चर्चा की। वहीं अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, कोलकाता के डॉ. कौस्तभ चौधरी ने इमरजेंसी PICU केस से जुड़े अनुभव साझा किए। ICH, कोलकाता के डॉ. जयदीप चौधरी ने लंबे समय तक ठीक नहीं होने वाले निमोनिया के मामलों पर चर्चा की और उपचार के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
बच्चों की हार्ट सर्जरी और एलर्जी पर भी चर्चा
सम्मेलन में बच्चों की हार्ट सर्जरी से जुड़े विषय पर भी विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। NH रवींद्रनाथ हॉस्पिटल, कोलकाता के डॉ. सौरभ घोष ने बच्चों की हार्ट सर्जरी के लिए सही समय और उससे जुड़े चिकित्सकीय पहलुओं पर चर्चा की। वहीं मणिपाल हॉस्पिटल, भुवनेश्वर के डॉ. शुभ्राजीत परिडा ने भोजन, एलर्जी या अस्थमा के कारण बच्चों में होने वाली घरघराहट के विषय पर जानकारी दी। शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज, पश्चिम बंगाल के प्रो. तापस सबुई ने भी सम्मेलन में अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की।
झारखंड के बच्चों को बेहतर इलाज देने पर जोर
मुख्य आयोजन सचिव डॉ. शक्ति पद दास ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य झारखंड के बच्चों को बेहतर और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में डॉक्टरों के ज्ञान और अनुभव को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के जरिए राज्य के युवा डॉक्टरों को देशभर के अनुभवी विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिला। इस तरह के आयोजनों से बाल चिकित्सा के क्षेत्र में नई उपचार तकनीकों और अनुभवों को साझा करने में मदद मिलती है, जिसका लाभ भविष्य में बच्चों के इलाज में मिल सकता है।
















