लेस्लीगंज में नवजात की मौत, अस्पताल के संचालन पर उठे गंभीर सवाल

Meenu | June 26, 2026 | 12:33 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,पलामू :लेस्लीगंज के ढेला रोड स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और अस्पताल की वैधता दोनों ही जांच के घेरे में हैं। जानकारी के अनुसार, न्यू आशीर्वाद हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले के सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। बताया जा रहा है कि इसी भवन में संचालित आशीर्वाद हॉस्पिटल को कुछ दिन पहले प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन की देखरेख में सील किया गया था। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन आवश्यक मान्यता और दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहा था।

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बिना योग्य डॉक्टर के इलाज का आरोप

स्वास्थ्य विभाग की पूर्व जांच में सामने आया था कि अस्पताल का निबंधन डॉ. अभिजीत आनंद के नाम पर है, जो वर्तमान में चतरा में कार्यरत हैं। वहीं ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर के रूप में डॉ. जन्मेजय का नाम दर्ज था, लेकिन निरीक्षण के समय अस्पताल में कोई भी डिग्रीधारी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। मौके पर केवल अस्पताल संचालक विकास कुमार कुशवाहा मौजूद थे, जिनके पास चिकित्सकीय योग्यता का कोई प्रमाण नहीं पाया गया था। आरोप है कि अस्पताल को सील किए जाने के बाद उसी भवन और पुराने ढांचे में केवल नाम बदलकर न्यू आशीर्वाद हॉस्पिटल के रूप में नया निबंधन प्राप्त कर दोबारा संचालन शुरू कर दिया गया। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक ही परिसर में दो निबंधन पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ही परिसर में दो अलग-अलग निबंधनों के आधार पर अस्पताल का संचालन कैसे हुआ, यह जांच का विषय है। यह भी सवाल उठ रहा है कि बिना प्रभावी भौतिक सत्यापन के नया निबंधन कैसे जारी किया गया। मृत नवजात के पिता संजीत राम, जो बरवाडीह थाना क्षेत्र के पोखरी गांव के निवासी हैं, ने अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय स्वास्थ्य सहिया अंजू देवी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें बेहतर इलाज और सुरक्षित प्रसव का भरोसा देकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान नवजात की मौत हो गई।

स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी

सिविल सर्जन अनिल कुमार श्रीवास्तव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट के बाद ही अस्पताल की वैधता और लापरवाही के आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।

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