कोडरमा में आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों का धरना, बकाया भुगतान और न्यूनतम मानदेय लागू करने की मांग

Rupa Kumari | July 24, 2026 | 12:51 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, कोडरमा : सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय लागू करने और छह माह से लंबित भुगतान की मांग को लेकर झारखंड स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ (CITU) की जिला कमिटी कोडरमा के बैनर तले आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों ने शुक्रवार को श्रम अधीक्षक कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार आवाज उठाई और जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

मानदेय में भारी अंतर का लगाया आरोप

धरना दे रहे कर्मियों का आरोप है कि सरकार की ओर से आउटसोर्सिंग कंपनी को प्रत्येक कर्मचारी के लिए लगभग 26 हजार रुपये का भुगतान किया जाता है, लेकिन कर्मचारियों को केवल 12 हजार से 12 हजार 600 रुपये तक का ही मानदेय मिल रहा है। संघ ने इस अंतर की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कर्मियों का कहना है कि वास्तविक भुगतान और प्राप्त मानदेय के बीच इतना बड़ा अंतर कई सवाल खड़े करता है, जिसकी जांच आवश्यक है।

EPF में अनियमितता का भी आरोप

प्रदर्शनकारियों ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़ी अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि वेतन भुगतान में देरी और EPF कटौती में कथित गड़बड़ियों के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने मांग की कि EPF और अन्य कटौतियों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। धरने के दौरान संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि लंबे समय से स्वास्थ्य कर्मी अपनी समस्याओं को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। यदि जल्द मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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संघ की प्रमुख मांगें

सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय तत्काल लागू किया जाए। छह माह से लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए। EPF और अन्य वित्तीय कटौतियों में कथित अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।

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