JPSC घोटाले में बड़ा खुलासा! FRO के लिए 25 लाख, ACF के लिए 35 लाख की बोली; अभय तिवारी के बयान से CID जांच में नया मोड़

Rupa Kumari | August 12, 2026 | 11:23 AM IST
  • आरोपी ने करोड़ों रुपये की वसूली, अभ्यर्थियों की सेटिंग और इंटरव्यू में कथित हेरफेर के लगाए गंभीर आरोप

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : JPSC परीक्षा अनियमितता मामले की जांच के दौरान आरोपी अभय तिवारी के कथित बयान ने कई सनसनीखेज दावों को जन्म दिया है। CID को दिए गए बयान में अभय तिवारी ने FRO (Forest Range Officer) और ACF (Assistant Conservator of Forest) पदों पर नियुक्ति के लिए लाखों रुपये की कथित बोली लगने और करोड़ों रुपये के लेन-देन का दावा किया है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और इनकी पुष्टि अभी शेष है।

FRO और ACF पदों के लिए लाखों की कथित बोली

अभय तिवारी के अनुसार, FRO पद के लिए 20 से 25 लाख रुपये और ACF पद के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक की कथित बोली लगती थी। उसने दावा किया कि उसके नेटवर्क के माध्यम से FRO के 12 और ACF के 8 अभ्यर्थियों समेत कुल 20 उम्मीदवारों को जोड़ा गया था। इनमें से 19 अभ्यर्थियों के चयनित होने का दावा किया गया है। बयान के मुताबिक, इन अभ्यर्थियों से कुल 5.80 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी, जिसमें से लगभग एक करोड़ रुपये उसने अपने पास रखे थे। अभ्यर्थियों को विभिन्न एजेंटों के जरिए जोड़ने और चयन के बाद उनसे राशि लेने की बात भी बयान में कही गई है।

JPSC के पूर्व पदाधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

अभय तिवारी ने अपने बयान में JPSC के तत्कालीन सदस्य अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनीमा हांसदा के साथ-साथ पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते का भी नाम लिया है। उसने आरोप लगाया कि 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं में कथित तौर पर अभ्यर्थियों से चरणबद्ध तरीके से पैसे लिए जाते थे। उसके अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से पांच लाख रुपये तथा एससी-एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों से दो से तीन लाख रुपये तक लिए जाते थे। वहीं अंतिम चयन सुनिश्चित करने के लिए प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये तक की कथित मांग की जाती थी।

इंटरव्यू और कोड डी-कोडिंग में हेरफेर का दावा

बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPPL के निदेशक रामवीर सिंह के माध्यम से अभ्यर्थियों की पैरवी JPSC सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी। अभय तिवारी ने दावा किया कि इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थियों के कोड डी-कोड कर उनकी पहचान पता की जाती थी और उन्हें विशेष बोर्ड में आवंटित कराने की कोशिश होती थी। उसने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए कुछ चयनित अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में लाभ पहुंचाया जाता था। बयान में सात अभ्यर्थियों को कथित तौर पर इस व्यवस्था से फायदा पहुंचाने और प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये लेने का भी दावा किया गया है।

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CDPO परीक्षा में भी लेन-देन का आरोप

अभय तिवारी ने CDPO परीक्षा में भी कथित अनियमितताओं का जिक्र किया है। उसके अनुसार, इस परीक्षा में प्रति अभ्यर्थी 10 लाख रुपये का रेट तय था। कुछ अभ्यर्थियों के नाम लेते हुए उसने इंटरव्यू बोर्ड में प्रभाव डालने के लिए कथित तौर पर लाखों रुपये दिए जाने का दावा किया है।CID फिलहाल अभय तिवारी के बयान, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य आरोपित व्यक्तियों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही है। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही आरोपों की सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।

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