Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच एक बड़े परीक्षा माफिया नेटवर्क को लेकर नए दावे सामने आए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों में ICN इंडिया के निदेशक मिथिलेश सिंह को कथित तौर पर परीक्षा माफिया अभय तिवारी का “गुरु” बताया गया है। आरोप है कि दोनों का नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं, बल्कि बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों तक फैला हुआ है।
मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी पर सस्पेंस
सूत्रों के अनुसार, मिथिलेश सिंह को सादे लिबास में पहुंची एक टीम ने हिरासत में लिया है। हालांकि, CID ने अब तक उनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल गिरफ्तारी की खबर की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसी वजह से मिथिलेश सिंह की वास्तविक स्थिति को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।
पेपर लीक और OMR में छेड़छाड़ के आरोप
दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि नेटवर्क वर्षों से विभिन्न राज्यों की प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने, OMR शीट में छेड़छाड़ करने और पैसे लेकर अभ्यर्थियों को पास कराने जैसे कार्यों में शामिल रहा है। दावा है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसियों और कंपनियों तक पहुंच बनाकर प्रश्नपत्र और OMR शीट से संबंधित गोपनीय सूचनाएं हासिल की जाती थीं, जिनका दुरुपयोग किया जाता था।
2022 JE परीक्षा का भी जिक्र
दस्तावेज के अनुसार, 3 जुलाई 2022 को आयोजित झारखंड जूनियर इंजीनियर (JE) परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से तीन दिन पहले ही लीक कर दिया गया था। आरोप है कि बिहार और झारखंड के करीब 700 अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाया गया था। पेपर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस मामले में अभिषेक कुमार नामक व्यक्ति की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया गया है। दस्तावेजों में दावा किया गया है कि JSSC द्वारा एक कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद भी मिथिलेश सिंह की कंपनी ICN इंडिया को JPSC परीक्षा से जुड़े कार्य, जैसे प्रश्नपत्र छपाई और OMR स्कैनिंग का काम मिला। आरोप है कि इसी पहुंच का इस्तेमाल परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के लिए किया गया।
2024 की स्नातक स्तरीय परीक्षा भी जांच के घेरे में
28 जनवरी 2024 को आयोजित झारखंड स्नातक स्तरीय परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा है कि राजस्थान के कथित परीक्षा माफिया से मिलकर प्रश्नपत्र लीक कराया गया और बिहार के गया तथा औरंगाबाद क्षेत्रों में अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। पेपर लीक की आशंका के बाद यह परीक्षा भी विवादों में आ गई थी। दस्तावेजों में राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, बिहार और तेलंगाना में हुए कथित पेपर लीक मामलों का भी उल्लेख है। दावा किया गया है कि मिथिलेश सिंह का नाम विभिन्न राज्यों में दर्ज कई मामलों में सामने आया और वह पूर्व में कई बार जेल भी जा चुका है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने का आरोप
दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा फर्जीवाड़े से अर्जित धन के जरिए बिहार, झारखंड, दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, राजस्थान और पुणे समेत कई स्थानों पर करोड़ों रुपये की संपत्तियां खरीदी गईं। दावा किया गया है कि मिथिलेश सिंह के नेटवर्क ने लगभग 300 करोड़ रुपये और अभय तिवारी ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की। इन दावों की भी जांच एजेंसियों द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यह भी पढ़ें : निशांत कुमार ने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना, परिवार के लिए खरीदी चूड़ी-लहठी
जांच के केंद्र में ‘गुरु-शिष्य’ कनेक्शन
JPSC-JSSC कथित घोटाले की जांच में अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि अभय तिवारी के पीछे कौन था। उपलब्ध दस्तावेजों में मिथिलेश सिंह को उसका प्रमुख मार्गदर्शक बताते हुए दोनों पर मिलकर पेपर लीक और OMR हेरफेर का नेटवर्क संचालित करने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल पूरे मामले में कई आरोप दस्तावेजों और सूत्रों के हवाले से सामने आए हैं। मिथिलेश सिंह की कथित गिरफ्तारी और उनके खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम स्थिति CID या अन्य जांच एजेंसियों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

