कचरा अब बनेगा कमाई का जरिया, बिना सरकारी सब्सिडी शहरों में लगेंगे कचरा प्रसंस्करण प्लांट

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड के शहरी निकायों में कचरा अब सिर्फ डंपिंग यार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नहीं रहेगा, बल्कि इससे कमाई का रास्ता भी तैयार किया जाएगा। राज्य शहरी विकास एजेंसी (सूडा) ने कचरा प्रसंस्करण के लिए ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें निजी कंपनियां अपने खर्च पर आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र लगाएंगी। कचरे से तैयार उत्पादों को बेचकर होने वाला पूरा राजस्व भी संबंधित निजी कंपनी के पास रहेगा। प्रस्तावित संयंत्रों में रोजाना करीब 100 से 150 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाएगा। इस व्यवस्था से शहरों में कचरे के बढ़ते बोझ को कम करने के साथ डंपिंग यार्ड और लैंडफिल पर निर्भरता घटाने की तैयारी है।

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सरकार नहीं देगी सब्सिडी, निजी कंपनियां लगाएंगी पैसा

इस मॉडल की खास बात यह है कि प्लांट लगाने या उसके संचालन के लिए सरकार निजी कंपनियों को कोई सब्सिडी या वित्तीय सहायता नहीं देगी। संयंत्र की स्थापना से लेकर संचालन और रखरखाव तक की जिम्मेदारी निजी विशेषज्ञ कंपनियों की होगी। इसके बदले नगर निकाय कंपनियों को जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। इनमें प्लांट के लिए जमीन, पानी और कचरे की उपलब्धता प्रमुख है। कचरे से तैयार होने वाले उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला राजस्व निजी कंपनी को मिलेगा।

गीले कचरे से बनेगी बायोगैस और जैविक खाद

प्रसंस्करण संयंत्रों में गीले कचरे का उपयोग बायोगैस और जैविक खाद तैयार करने में किया जाएगा। वहीं अनुपयोगी सूखे कचरे से आरडीएफ ईंधन तैयार होगा, जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जा सकता है। प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी दोबारा इस्तेमाल होने वाली सामग्री को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। इस तरह कचरे के अलग-अलग हिस्सों का उपयोग कर उससे आर्थिक मूल्य तैयार करने की योजना है।

डंपिंग यार्ड और लैंडफिल पर घटेगा दबाव

सूडा के इस मॉडल का उद्देश्य शहरों में रोज निकलने वाले कचरे को सीधे डंपिंग यार्ड में जमा करने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण करना है। इससे डंपिंग यार्ड में कचरे का बोझ कम होगा और लैंडफिल के लिए जमीन की जरूरत भी घटेगी। सूडा के अनुसार, वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से कचरे के प्रसंस्करण से हवा में फैलने वाले सूक्ष्म कणों के उत्सर्जन में 99 प्रतिशत से अधिक कमी लाई जा सकेगी।

निकायों की भूमिका होगी सीमित

नई व्यवस्था में नगर निकायों की मुख्य भूमिका कचरा उपलब्ध कराने और प्लांट के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने की होगी। वहीं निजी कंपनियां संयंत्र लगाने, मशीनरी की व्यवस्था करने, कचरे का प्रसंस्करण करने और तैयार उत्पादों की बिक्री का काम संभालेंगी। इस मॉडल के लागू होने के बाद शहरों में कचरा प्रबंधन को केवल खर्च वाली व्यवस्था के बजाय आय और संसाधन तैयार करने वाली व्यवस्था में बदलने का लक्ष्य है।

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