कैथी लिपि में लिखे पुराने भूमि रिकॉर्ड पढ़ना होगा आसान, झारखंड सरकार ने तैयार की विशेष पाठ्यपुस्तिका

Rupa Kumari | July 3, 2026 | 02:57 PM IST
  • पुराने खतियान और भू-अभिलेख समझने में मिलेगी मदद, राजस्व कर्मियों और आम लोगों दोनों को होगा लाभ

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड सरकार ने पुराने भूमि अभिलेखों को समझने और पढ़ने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने कैथी लिपि में लिखे पुराने भू-अभिलेखों के अध्ययन हेतु एक विशेष पाठ्यपुस्तिका तैयार की है। सरकार का मानना है कि इस पहल से भूमि संबंधी मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और पुराने रिकॉर्ड को समझने में होने वाली समस्याएं कम होंगी।

पुराने खतियान पढ़ने में होगी आसानी

विभाग के अनुसार झारखंड के कई पुराने भू-अभिलेख, खतियान और विलेज (जेड) रजिस्टर कैथी लिपि में लिखे गए हैं। समय के साथ इस लिपि को पढ़ने और समझने वाले लोगों की संख्या काफी कम हो गई है। इसके कारण भूमि स्वामित्व, सीमांकन, हस्तांतरण और अन्य राजस्व मामलों के निपटारे में कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती रही हैं। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव चंद्रशेखर द्वारा जारी प्रस्तावना में कहा गया है कि पुराने अभिलेखों की सही समझ भूमि विवादों के समाधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

आम लोगों से लेकर अधिकारियों तक को मिलेगा लाभ

विभाग ने कैथी लिपि को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाने के उद्देश्य से यह पाठ्यपुस्तिका तैयार की है। इससे न केवल आम नागरिकों को पुराने भूमि रिकॉर्ड समझने में सहायता मिलेगी, बल्कि राजस्व विभाग के कर्मचारी और अधिकारी भी अभिलेखों का अध्ययन अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस पाठ्यपुस्तिका के उपयोग से पुराने रिकॉर्ड की व्याख्या आसान होगी और भूमि विवादों के निपटारे में लगने वाला समय कम हो सकता है। साथ ही अभिलेखों के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक बनेगी।

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ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण की दिशा में पहल

विशेषज्ञों के अनुसार कैथी लिपि लंबे समय तक बिहार और झारखंड क्षेत्र में प्रशासनिक एवं राजस्व अभिलेखों के लेखन में उपयोग की जाती रही है। ऐसे में यह पहल न केवल राजस्व प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण और अध्ययन की दृष्टि से भी उपयोगी साबित हो सकती है।

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