झारखंड कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग पर भड़के मंत्री, योजनाओं की फाइलें लंबित रहने पर उठाए सवाल

Meenu | July 4, 2026 | 11:51 AM IST

Samhar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में गुरुवार को वित्त विभाग की कार्यशैली को लेकर मंत्रियों की नाराजगी खुलकर सामने आई। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने वित्त विभाग पर योजनाओं की फाइलें महीनों तक लंबित रखने का आरोप लगाया। मंत्रियों का कहना था कि विभागीय योजनाओं की फाइलें जानबूझकर रोकी जाती हैं और अनावश्यक जानकारियां मांगकर काम में देरी की जाती है। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन जरूरी है, लेकिन फाइलों को लंबे समय तक रोकना विकास कार्यों को प्रभावित कर रहा है।

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“समय पर फंड नहीं मिलने से योजनाएं प्रभावित”

नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने नगर विकास विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं के अटकने पर चिंता जताई। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने रिम्स-2 परियोजना से जुड़ी फाइलों पर वित्त विभाग द्वारा बार-बार जानकारी मांगे जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी कहा कि कई योजनाओं का क्रियान्वयन बजट और फाइल मंजूरी में देरी के कारण प्रभावित हो रहा है।

रिम्स-2 परियोजना पर वित्त विभाग ने मांगी विस्तृत जानकारी

रिम्स-2 निर्माण परियोजना के लिए कैबिनेट पहले ही 4000 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दे चुकी है। इसके बावजूद फाइल वित्त विभाग पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा गया। वित्त विभाग ने पूछा कि इतने बड़े अस्पताल के संचालन के लिए डॉक्टर, पारा मेडिकल स्टाफ और अन्य मानव संसाधनों की व्यवस्था कैसे की जाएगी। इसके अलावा परियोजना से जुड़े आठ से नौ अलग-अलग बिंदुओं पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

अधिकारी वित्तीय अनुशासन के तहत मांगते हैं जानकारी- वित्त मंत्री

पूरे मामले पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि हर फाइल मंत्री स्तर तक नहीं आती और कई मामलों का निपटारा अधिकारियों के स्तर पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो फाइलें उनके पास आती हैं, उन्हें जल्द निपटाने की कोशिश की जाती है। साथ ही विभागीय मंत्रियों के साथ लगातार संवाद भी होता रहता है।वित्त मंत्री ने माना कि अधिकारी वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए जानकारी मांगते हैं, लेकिन समय सीमा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

नगर विकास विभाग की अटकी प्रमुख योजनाएं

नगर विकास विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाएं फिलहाल लंबित हैं। इनमें आदित्यपुर, मानगो, जमशेदपुर, जुगसलाई और कपाली में 74.64 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सीवरेज वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शामिल है। इसके अलावा चास में 21.27 करोड़ रुपये की लागत वाला सीवरेज वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट भी अटका हुआ है। दुमका, लोहरदगा, मधुपुर, मेदिनीनगर और सिमडेगा में लीगेसी वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर भी काम आगे नहीं बढ़ पाया है। वहीं 27 नगर निकायों में यूज्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट लंबित है। इसके साथ ही 7 नगर निकायों में 29.38 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 35 पार्कों के निर्माण कार्य में भी देरी हो रही है।

ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं पर भी असर

वित्तीय स्वीकृति में देरी का असर ग्रामीण विकास विभाग की कई योजनाओं पर भी पड़ रहा है। अबुआ आवास योजना के तहत अधूरे पड़े आवासों को पूरा करने के लिए आवश्यक बजट अब तक लंबित है। वहीं झारखंड जल छाजन योजना के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 79.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन राशि जारी नहीं होने से काम शुरू नहीं हो सका है। इसके अलावा 28 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित SIRD प्रोजेक्ट भी लंबित पड़ा है। वहीं 10 करोड़ रुपये की अंबेडकर आवास योजना फंड की कमी के कारण प्रभावित हो रही है। कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और डॉ. इरफान अंसारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कैबिनेट की अंदरूनी चर्चाओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना उचित नहीं है।

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