दुबई में फंसे गिरिडीह के प्रवासी मजदूर लालचंद महतो, परिवार ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

Rupa Kumari | July 4, 2026 | 05:30 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र स्थित तिरला गांव के निवासी लालचंद महतो दुबई में फंस गए हैं। उनकी पत्नी ने केंद्र और राज्य सरकार से हस्तक्षेप कर पति की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है। परिजनों के अनुसार, लालचंद महतो रोजगार की तलाश में दुबई गए थे, जहां वे कारपेंटर (बढ़ई) के रूप में कार्य कर रहे थे। इसी दौरान उनका पासपोर्ट गुम हो गया, जिसके बाद उनकी परेशानियां बढ़ गईं। पासपोर्ट नहीं होने के कारण उन्हें प्रशासनिक और कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं कंपनी ने भी उन्हें काम से हटा दिया है। परिवार का कहना है कि लालचंद महतो भारत लौटना चाहते हैं, लेकिन आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है। रोजगार छूट जाने के बाद वे आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों के बीच विदेश में रहने को मजबूर हैं।

आर्थिक संकट से गुजर रहा परिवार

लालचंद की पत्नी ने बताया कि परिवार पहले से ही गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है। उनके ससुर दशरथ महतो वर्ष 2013 से मुंबई से लापता हैं। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी लालचंद महतो पर थी। अब उनके विदेश में फंस जाने से परिवार की स्थिति और अधिक कठिन हो गई है। परिजनों ने सरकार से मानवीय आधार पर मदद की अपील करते हुए कहा है कि आवश्यक कानूनी और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराकर लालचंद महतो को जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए।

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता

प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले सिकंदर अली ने भी इस मामले में सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि विदेशों में फंसे श्रमिकों की समस्याएं लगातार सामने आती रही हैं और कई मामलों में मजदूरों की मौत तक हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में गिरिडीह के द्वारका महतो और बोकारो के सत्येंद्र महतो का शव सऊदी अरब में पड़ा हुआ है। वहीं बगोदर के महेंद्र महतो सऊदी अरब में फंसे हैं और डुमरी के हुलास महतो दुबई की जेल में बंद हैं।

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स्थानीय रोजगार सृजन की मांग

सिकंदर अली ने कहा कि बेहतर रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा विदेशों का रुख कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।

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