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पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते समेत 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, 26 अक्टूबर को सुनवाई

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Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और मेधा घोटाले की जांच कर रहे अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने पूर्व आयोग अध्यक्ष एल ख्यांग्ते, पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन करने वाली निजी एजेंसी TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी समेत 12 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। मामले में चार्जशीट पर पहली सुनवाई 26 अक्टूबर को होनी है। जांच में ओएमआर शीट से कथित छेड़छाड़, परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग, परिणामों में डिजिटल हेरफेर और अभ्यर्थियों से पैसे लेकर चयन में मदद करने जैसे आरोप शामिल हैं। अब अदालत में आरोप पत्र के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।

OMR शीट से छेड़छाड़ और रिजल्ट में हेरफेर के आरोप

CID की जांच में वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) और सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षाओं की ओएमआर शीट में कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। इसके अलावा उत्तर पुस्तिकाओं को परीक्षा परिसर से बाहर ले जाने और परीक्षा परिणामों में डिजिटल हेरफेर किए जाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। आरोप पत्र में परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों और उत्तर-कुंजी के कथित आदान-प्रदान का भी उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार, JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने 26 मई 2026 को व्हाट्सऐप के जरिए परीक्षा की उत्तर-कुंजी TDPL के कर्मचारी मोहम्मद उस्मान को भेजी थी। CID ने इस घटनाक्रम को जांच से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल किया है।

एल ख्यांग्ते समेत 12 आरोपियों के नाम

CID की ओर से दाखिल चार्जशीट में निम्नलिखित 12 आरोपियों के नाम शामिल हैं:

  1. एल ख्यांग्ते, JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष
  2. श्वेता कुमारी गुप्ता, पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक
  3. अभय कुमार तिवारी, TDPL के मार्केटिंग मैनेजर
  4. रामवीर सिंह, TDPL के निदेशक
  5. मोहम्मद उस्मान
  6. मोहम्मद एबाद
  7. हेमंत कुमार वर्मा
  8. प्रदीप कुमार सिंह
  9. संजय कुमार
  10. सोनू कुमार
  11. अरविंद कुमार
  12. सुमन सौरभ

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारियां जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान हुई थीं। मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद समेत पांच आरोपियों को 22 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। हेमंत कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार की गिरफ्तारी 24 जुलाई को हुई। सोनू कुमार और अरविंद कुमार को 25 जुलाई, जबकि सुमन सौरभ को 30 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को 10 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों की 10 जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं और वे जेल में हैं।

डिफॉल्ट बेल की समयसीमा से पहले दाखिल हुई चार्जशीट

CID ने अपर न्यायायुक्त प्रथम की अदालत में अवकाश के दौरान आरोप पत्र दाखिल किया। जांच एजेंसी के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करना महत्वपूर्ण था। रिपोर्ट के अनुसार, आरोप पत्र दाखिल करने में एक दिन की देरी होने पर 12 में से पांच आरोपी डिफॉल्ट बेल के हकदार हो सकते थे। डिफॉल्ट बेल का प्रावधान निर्धारित अवधि में जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने की स्थिति से जुड़ा है, बशर्ते कानून की अन्य शर्तें पूरी हों। इस मामले में आगे एक और चार्जशीट दाखिल किए जाने की संभावना जताई गई है। फिलहाल, 26 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर नजर है।

अभय तिवारी के बैंक खातों और लेनदेन की जांच

जांच में TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी की कथित भूमिका पर भी ध्यान दिया गया है। उसके बैंक खातों में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, एजेंसी के निदेशकों के होटल खर्च के भुगतान और अभ्यर्थियों के साथ कथित संपर्कों की पड़ताल की गई है। आरोप है कि अभय तिवारी आयोग, परीक्षा संचालन करने वाली निजी एजेंसी और अभ्यर्थियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता था। CID ने परीक्षा संचालन का ठेका देने की प्रक्रिया और निजी एजेंसी को सौंपी गई जिम्मेदारियों की भी जांच की है। जांच में यह आरोप भी शामिल है कि नियमित निविदा प्रक्रिया के बजाय नामांकन के आधार पर एजेंसी को काम दिया गया और उसे परीक्षा से जुड़े संवेदनशील कार्य सौंपे गए। इन आरोपों की न्यायिक जांच आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगी।

पांच लाख से 25 लाख रुपये तक वसूली का आरोप

मामले में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लेकर परीक्षा में सफलता दिलाने के आरोप भी सामने आए हैं। प्रारंभिक परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए करीब पांच लाख रुपये और अंतिम चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर 10 लाख से 25 लाख रुपये तक वसूले जाने का आरोप है। CID ने कथित वित्तीय लेनदेन, अभ्यर्थियों के साथ संपर्क और परीक्षा प्रक्रिया में संभावित हस्तक्षेप से जुड़े पहलुओं की जांच की है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।

CID थाना कांड संख्या 16/2026 से जुड़ा है मामला

यह प्रकरण CID थाना कांड संख्या 16/2026 से संबंधित है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत अन्य आरोपों तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज है। इस मामले में दो दर्जन से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत में आगे की सुनवाई होगी। जांच के शेष पहलुओं पर भी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। अब 26 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई अहम होगी। इस दौरान आरोप पत्र से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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