39 साल पुराने 200 रुपये रिश्वत मामले में झारखंड हाईकोर्ट का फैसला, आरोपी भोलू मंडल बरी

Meenu | July 23, 2026 | 10:39 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने 39 साल पुराने 200 रुपये रिश्वत मामले में अहम फैसला सुनाते हुए धनबाद की बसंतीमाता कोलियरी के कर्मचारी भोलू मंडल को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में केवल रिश्वत की रकम बरामद होना या उसे स्वीकार करना दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह भी साबित करना होता है कि आरोपी ने रिश्वत की मांग की थी।

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हाईकोर्ट ने रद्द की ट्रायल कोर्ट की सजा

जस्टिस अरुण कुमार राय की अदालत ने भोलू मंडल की अपील स्वीकार करते हुए वर्ष 2002 में धनबाद की सीबीआई विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई दो वर्ष की सजा और 300 रुपये जुर्माने के आदेश को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। ऐसे में केवल बरामदगी के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

शिकायतकर्ता की मौत, गवाह भी बयान से मुकरा

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मामले के शिकायतकर्ता सुखलाल दास की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो चुकी थी, जिसके कारण उनका बयान अदालत में दर्ज नहीं हो सका। इसके अलावा, सीबीआई का एक स्वतंत्र गवाह अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गया। अदालत ने यह भी माना कि स्वतंत्र गवाहों और सीबीआई अधिकारियों के बयानों में रिश्वत मांगने के संबंध में महत्वपूर्ण विरोधाभास थे। इन्हीं कारणों से अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए रिश्वत की मांग साबित होना आवश्यक है। केवल रिश्वत की राशि की बरामदगी या स्वीकार करने से दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।

1987 में सीबीआई ने किया था ट्रैप

यह मामला दिसंबर 1987 का है। शिकायतकर्ता सुखलाल दास ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी की राशि जारी करने के लिए बसंतीमाता कोलियरी के कर्मचारी भोलू मंडल ने 200 रुपये और दूसरे कर्मचारी डब्ल्यूएच खान ने 300 रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के बाद सीबीआई ने 16 दिसंबर 1987 को ट्रैप बिछाया और दोनों कर्मचारियों को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान भोलू मंडल के पास से 200 रुपये और डब्ल्यूएच खान के पास से 300 रुपये बरामद किए गए थे। इसके बाद सीबीआई ने दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। वर्ष 2002 में सीबीआई की विशेष अदालत ने भोलू मंडल को दोषी ठहराया था, लेकिन अब झारखंड हाईकोर्ट ने उस फैसले को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया है।

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