Samachar Post रिपोर्टर, रांची : MMDR एक्ट को लेकर झारखंड सरकार और केंद्र के बीच जारी मतभेद अब कानूनी लड़ाई में बदलने जा रहा है। राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला लिया है। शीर्ष अदालत जाने से पहले सरकार ने मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया है। महाधिवक्ता ने भी मामले पर अपना कानूनी ओपिनियन राज्य सरकार को सौंप दिया है। बताया गया है कि महाधिवक्ता की ओर से कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने को हरी झंडी मिलने के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
महाधिवक्ता के ओपिनियन के बाद बढ़ी तैयारी
सरकार के अनुसार, महाधिवक्ता के कानूनी मत में राज्य सरकार के दावों को मजबूत बताया गया है। इसी आधार पर अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाने वाली याचिका को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार की ओर से शीर्ष वकीलों की टीम मामले के कानूनी आधार और संवैधानिक पहलुओं को शामिल करते हुए याचिका का ड्राफ्ट तैयार कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट में रखे जाएंगे राज्य के तर्क
सरकार का मानना है कि MMDR एक्ट से जुड़े मामले में उसके कानूनी और संवैधानिक तर्कों को मजबूती से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संबंधित दस्तावेज और कानूनी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। सरकार के इस फैसले के बाद केंद्र और झारखंड के बीच MMDR एक्ट को लेकर जारी विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचने वाला है।
यह भी पढ़ें : JSSC-CGL कथित धांधली: CID ने 20 और सफल अभ्यर्थियों को भेजा नोटिस, SIT करेगी पूछताछ
खनिज संपदा से जुड़े राज्यों की भी नजर
झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और MMDR एक्ट से जुड़े प्रावधानों का राज्य के राजस्व एवं खनन क्षेत्र पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर झारखंड के अलावा खनिज संसाधनों वाले अन्य राज्यों की भी नजर रहने की उम्मीद है। फिलहाल राज्य सरकार याचिका को अंतिम रूप देने और शीर्ष अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी में जुटी है।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

