JSSC फील्ड वर्कर परीक्षा पर विवाद, संथाली भाषा के अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल; आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न पूछने का आरोप

Rupa Kumari | July 22, 2026 | 05:38 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित झारखंड फील्ड वर्कर प्रतियोगिता परीक्षा (JFWCE-2024) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। संथाली भाषा के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि भाषा विषय के प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में पाठ्यक्रम से बाहर (आउट ऑफ सिलेबस) प्रश्न पूछे गए, जिससे उन्हें नुकसान हुआ है। बुधवार को झारखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने JSSC कार्यालय पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से मुलाकात कर परीक्षा से संबंधित शिकायतों को विस्तार से रखा।

40 प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस होने का दावा

अभ्यर्थियों का आरोप है कि संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 100 में से करीब 40 प्रश्न निर्धारित सिलेबस से बाहर पूछे गए। इसके अलावा चार प्रश्नों के उत्तर भी गलत या अमान्य बताए जा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि परीक्षा का सिलेबस स्पष्ट रूप से जारी किया गया था, लेकिन प्रश्नपत्र में ऐसे सवाल शामिल किए गए जो निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं थे। इससे संथाली भाषा के परीक्षार्थियों को नुकसान हुआ है। अभ्यर्थियों के अनुसार, आयोग के सचिव ने उन्हें आश्वस्त किया है कि उत्तर कुंजी (Answer Key) जारी होने के बाद आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम सभी शिकायतों और आपत्तियों की समीक्षा करेगी। छात्रों ने उम्मीद जताई है कि आयोग उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करेगा और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगा।

भाषा परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों पर विवाद

अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र के कुछ सवालों को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि संथाली भाषा के पेपर में ऐसा प्रश्न पूछा गया कि “महुआ को संस्कृत में क्या कहते हैं?” जबकि उनका तर्क है कि भाषा परीक्षा में संथाली भाषा से संबंधित प्रश्न पूछे जाने चाहिए थे। छात्रों का आरोप है कि कई प्रश्न ऐसे थे, जो उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC और UGC के पाठ्यक्रम से जुड़े प्रतीत होते हैं। उनका कहना है कि यदि इसी स्तर के प्रश्न पूछने थे तो आयोग को पहले से स्पष्ट रूप से इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई और परीक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं निकाला गया, तो वे आगे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले संबंधित मंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखी जाएगी। यदि इसके बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

कम उपस्थिति और एडमिट कार्ड को लेकर भी उठे सवाल

गौरतलब है कि 19 जुलाई को आयोजित झारखंड फील्ड वर्कर प्रतियोगिता परीक्षा 510 पदों के लिए आयोजित की गई थी। परीक्षा में मात्र 26 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इसके अलावा कई अभ्यर्थियों ने एडमिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। कुछ उम्मीदवारों का दावा है कि उन्हें परीक्षा के दिन तक प्रवेश पत्र नहीं मिला, जबकि कुछ को परीक्षा समाप्त होने के बाद एडमिट कार्ड प्राप्त हुआ। हालांकि, आयोग का कहना है कि वेबसाइट पर परीक्षा संबंधी सभी सूचनाएं समय पर उपलब्ध कराई गई थीं और एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की सुविधा भी दी गई थी। इसके बावजूद कई अभ्यर्थियों ने अंतिम दिनों में वेबसाइट के ठीक से काम नहीं करने की शिकायत की है।

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आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब अभ्यर्थियों की नजर उत्तर कुंजी जारी होने और आयोग द्वारा शिकायतों की समीक्षा प्रक्रिया पर है। यदि जांच में प्रश्नों या उत्तरों में त्रुटियां पाई जाती हैं, तो आयोग को आवश्यक संशोधन करने पड़ सकते हैं। फिलहाल यह मामला JSSC की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस का विषय बन गया है।

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