जमशेदपुर MGM अस्पताल में स्ट्रेचर के लिए 40 मिनट इंतजार, ऑटो में युवक की मौत; परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

Meenu | August 23, 2026 | 01:36 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। मानगो गुरुद्वारा रोड निवासी 34 वर्षीय विक्की सिंह की शनिवार को अस्पताल पहुंचने के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि गंभीर हालत में मरीज को अस्पताल लाने के बाद भी करीब 40 मिनट तक स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया और वह इमरजेंसी के बाहर ऑटो में ही पड़ा रहा। परिजनों के मुताबिक, बाद में दो लोगों ने विक्की को उठाकर इमरजेंसी तक पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

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शुक्रवार रात से बिगड़ी थी तबीयत

परिजनों के अनुसार, विक्की सिंह की तबीयत शुक्रवार रात से खराब थी। शनिवार दोपहर करीब पौने तीन बजे उन्हें ऑटो से एमजीएम अस्पताल लाया गया। इमरजेंसी के गेट पर पहुंचने के बाद परिजन मरीज को अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर की तलाश करते रहे। उनका आरोप है कि काफी देर तक स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका। मृतक के रिश्तेदार शुभजीत सिंह के अनुसार, स्ट्रेचर नहीं मिलने के कारण विक्की को करीब 40 मिनट तक इमरजेंसी के बाहर इंतजार करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि जब स्ट्रेचर की व्यवस्था नहीं हुई तो दो लोगों ने विक्की को उठाकर इमरजेंसी के अंदर पहुंचाया। इसके बाद उन्हें चेयर के सहारे आगे ले जाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बेटी पिता के शव से लिपटकर रोती रही

विक्की की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। मृतक की छोटी बेटी पिता के शव से लिपटकर रोती रही। परिजनों ने आरोप लगाया कि गंभीर मरीज के लिए स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं होना अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

MGM की इमरजेंसी व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और मरीजों को समय पर सहायता नहीं मिलने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ताजा घटना ने एक बार फिर अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और मरीजों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस घटना में स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने और उसकी वजह से मरीज की मौत होने के परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

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