Samachar Post रिपोर्टर, रांची : पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने JPSC और JSSC-CGL विवाद को लेकर झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को लाठी के बल पर दबाया नहीं जा सकता और इतिहास बताता है कि ऐसे प्रयासों का जनता विरोध करती है। चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए इमरजेंसी का हवाला दिया और कहा कि युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश का परिणाम सरकारों को भुगतना पड़ा है।
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राजस्थान SI भर्ती परीक्षा का दिया उदाहरण
चंपाई सोरेन ने झारखंड के JPSC और JSSC-CGL विवाद की तुलना राजस्थान की SI/दरोगा भर्ती परीक्षा से की। उन्होंने दावा किया कि 2021 में राजस्थान में भर्ती परीक्षा से जुड़ा पेपर लीक मामला सामने आया था, जिसमें लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद मामले की जांच शुरू हुई और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।
‘गिलास में जहर गिर जाए तो पानी से अलग नहीं किया जा सकता’
भाजपा नेता ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर परीक्षा में व्यापक गड़बड़ी के संदर्भ में ‘जहर मिले पानी’ का उदाहरण दिया गया था। चंपाई सोरेन ने इसी उदाहरण के जरिए कहा कि अगर किसी भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है, तो उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

सरकार पर लगाए आंदोलन दबाने के आरोप
चंपाई सोरेन ने झारखंड सरकार पर आरोप लगाया कि उसने छात्रों की मांगों को लेकर पहले CBI जांच से इनकार किया, फिर छात्रों से कथित तौर पर किए गए वादों के बाद आंदोलन खत्म कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद छात्रों के दोबारा प्रदर्शन करने पर पुलिस कार्रवाई और मुकदमों के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई। हालांकि, चंपाई सोरेन द्वारा लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों पर सरकार का पक्ष इस खबर में सामने नहीं आया है।
JPSC-JSSC विवाद पर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
JPSC और JSSC-CGL से जुड़े विवाद को लेकर झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। भाजपा लगातार सरकार पर छात्रों की मांगों को दबाने का आरोप लगा रही है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से मामले में अलग रुख सामने आता रहा है। ऐसे में चंपाई सोरेन का ताजा बयान इस राजनीतिक विवाद को और गरमा सकता है।

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