JPSC परीक्षा विवाद: CID पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी के दावे, OMR-OSM शीट में हेरफेर की बात आई सामने

Meenu | August 23, 2026 | 01:01 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित गड़बड़ी और धांधली के मामले की जांच कर रही CID को गिरफ्तार आरोपी मो. एबाद से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। पूछताछ में एबाद ने कथित तौर पर परीक्षा की OMR और OSM शीट में टेंपरिंग और मैनिपुलेशन किए जाने की जानकारी दी है। आरोपी के बयान के आधार पर जांच एजेंसी अब मामले से जुड़े अन्य लोगों और कथित नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही है। पूछताछ में JPSC की पूर्व परीक्षा उप-नियंत्रक श्वेता वर्मा, अभय तिवारी और अन्य लोगों के नाम सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।

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मो. एबाद कैसे आया JPSC से जुड़े काम के संपर्क में?

पूछताछ में सामने आए कथित विवरण के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के रोनाही गांव निवासी मो. एबाद जुलाई 2023 में पिकार टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में करीब 12,500 रुपये मासिक वेतन पर काम करता था। बताया गया है कि पिकार टेक्नोलॉजी के निदेशक मो. उस्मान, जो TDPL के माध्यम से JPSC कार्यालय रांची में टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर के तौर पर काम करते थे, ने एबाद को 18 हजार रुपये मासिक वेतन पर हेल्प डेस्क के काम का प्रस्ताव दिया। इसके बाद एबाद सितंबर 2025 में रांची आया। उसका काम परीक्षा फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थियों की मदद करना बताया गया है। हालांकि, पूछताछ में यह दावा सामने आया कि वह बिना औपचारिक जॉइनिंग लेटर के मो. उस्मान के निर्देशों पर काम करने लगा था।

सेटिंग के बाद OMR-OSM में बदलाव का दावा

CID की पूछताछ में एबाद के कथित बयान के आधार पर OMR और OSM शीट में हेरफेर के संबंध में कई दावे सामने आए हैं। कथित तौर पर श्वेता और अभय तिवारी के निर्देश पर एजेंट अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। कथित सेटिंग तय होने के बाद OMR और OSM शीट में बदलाव किया जाता था। OMR से संबंधित काम प्रदीप और OSM से जुड़ा काम हेमंत वर्मा द्वारा किए जाने का दावा किया गया है। पूछताछ में हेमंत वर्मा द्वारा OSM सिस्टम विकसित किए जाने की बात भी सामने आने का दावा है। कथित तौर पर OMR और OSM शीट में बदलाव का काम हेमंत वर्मा और संजय मिलकर करते थे। संजय के अभय तिवारी के संपर्क में रहने और अभय तथा श्वेता द्वारा अभ्यर्थियों से कथित समन्वय किए जाने की बात कही गई है।

टेंपरिंग के लिए बाहर से टेक्निकल टीम बुलाने का दावा

आरोपी के कथित बयान के अनुसार, जब OMR और OSM शीट में टेंपरिंग या मैनिपुलेशन किया जाता था, उस समय रामवीर सिंह और सतपाल की एक विशेष टेक्निकल टीम को बाहर से बुलाया जाता था। पूछताछ में इस पूरे कथित नेटवर्क की मॉनिटरिंग और सुपरविजन की जिम्मेदारी मो. उस्मान के पास होने का भी दावा किया गया है।

कैश में वेतन देने की बात भी सामने आई

एबाद के कथित बयान के मुताबिक, उसे अधिकांश वेतन नकद दिया जाता था। जरूरत पड़ने पर उसके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में भी पैसे ट्रांसफर किए जाते थे। CID अब पूछताछ में सामने आए इन दावों की जांच कर रही है। एजेंसी कथित तौर पर श्वेता वर्मा, अभय तिवारी और अन्य संदिग्ध लोगों के बीच संपर्क और पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

CID की जांच में आगे क्या होगा?

JPSC परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े इस मामले में CID की जांच आगे बढ़ने के साथ कई और नाम सामने आने की संभावना है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी के बयान में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनकी कानूनी जांच होना बाकी है।

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