पुतला दहन विवाद: 3 जिलों में करीब 1000 लोगों पर FIR, JPSC-JSSC मुद्दे पर BJP और JMM आमने-सामने

Meenu | August 23, 2026 | 12:48 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। पुतला दहन और प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बाद रांची, हजारीबाग और गिरिडीह में करीब 1000 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मामलों में 26 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस कार्रवाई को लेकर भाजपा और झामुमो के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है।

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रांची में तीन अलग-अलग FIR दर्ज

रांची में कोतवाली और लोअर बाजार थाना क्षेत्रों में तीन अलग-अलग FIR दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच से जुड़े 15 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि करीब 250 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। कोतवाली थाना क्षेत्र में रांची शहर के एसडीओ-सह-मजिस्ट्रेट शिवशंकर पांडेय के बयान पर दर्ज FIR में 15 लोगों को नामजद किया गया है। इसके अलावा रातू रोड निवासी अंकिता वर्मा ने मारपीट और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए सात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, लोअर बाजार थाने में शहबाज आलम ने मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए 10 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग मामलों में कुछ नाम समान भी बताए जा रहे हैं।

गिरिडीह में पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प

गिरिडीह में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ मारपीट के विरोध में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इसी दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों से पुतला छीनने की कोशिश के बाद विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। पुतला दहन को लेकर हुए विवाद के मामले में 11 नामजद समेत 36 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। शहर के छह अलग-अलग स्थानों पर पुतला दहन किए जाने की भी बात कही गई है।

हजारीबाग में 700 अज्ञात लोगों पर केस

हजारीबाग में भी प्रदर्शन और पुतला दहन के बाद पुलिस की कार्रवाई हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां करीब 700 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस कार्रवाई के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने इसे छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने की कार्रवाई बताया है, जबकि झामुमो ने प्रदर्शन में भाजपा कार्यकर्ताओं के शामिल होने का आरोप लगाया है।

भाजपा का आरोप- छात्रों की आवाज दबा रही सरकार

भाजपा ने राज्य सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने छात्रों के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि संवैधानिक अधिकारों के कथित हनन का विरोध किया जाएगा। पार्टी ने जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की बात भी कही है। भाजपा ने गिरिडीह में अपने कार्यकर्ताओं के साथ हुई कथित मारपीट की भी निंदा की है।

JMM का पलटवार- आंदोलन में छात्र नहीं, भाजपा के लोग शामिल थे

भाजपा के आरोपों पर झामुमो ने पलटवार किया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि अदालत ने स्टे दिया है, फैसला नहीं। उनके मुताबिक, सरकार 15 दिन में हलफनामा दाखिल करेगी और इसके बाद अदालत के स्तर पर जो फैसला होगा, उसका पालन किया जाएगा। झामुमो की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन में छात्र नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े लोग शामिल थे और उन्हीं की ओर से पुतला दहन किया जा रहा था। पार्टी ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी।

अमृता प्रसाद को पूछताछ के लिए महिला थाना ले जाने पर भी विवाद

रांची के अन्य थाना क्षेत्रों में भी इस मुद्दे को लेकर हंगामे की स्थिति बनी। पुलिस द्वारा सोशल एक्टिविस्ट अमृता प्रसाद को पूछताछ के लिए महिला थाना ले जाने के बाद वहां भी विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। मामले की जानकारी मिलने पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, रांची विधायक सीपी सिंह समेत अन्य भाजपा नेता थाने पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, अमृता प्रसाद को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की बात सामने आई थी।

JPSC-JSSC विवाद पर सियासी टकराव बढ़ा

JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर शुरू हुआ छात्रों का विरोध अब राजनीतिक विवाद में बदलता दिख रहा है। एक तरफ भाजपा सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रही है, वहीं झामुमो प्रदर्शन के पीछे भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका होने का दावा कर रहा है। तीन जिलों में बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और छात्र संगठनों का विरोध और तेज होने की संभावना है।

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