Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रात करीब 1:30 बजे बेड उपलब्ध नहीं होने की समस्या के बीच अस्पताल की लिफ्ट बंद रहने का मामला भी सामने आया। लिफ्ट के काम नहीं करने से दूसरी और तीसरी मंजिल पर भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। अस्पताल में गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों का इलाज होता है। ऐसे में लिफ्ट का बंद रहना खास तौर पर परेशानी बढ़ाने वाला है। स्ट्रेचर, व्हीलचेयर या ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों को सीढ़ियों से ले जाना जोखिम भरा हो सकता है।
बेड की समस्या के बाद अब लिफ्ट ने बढ़ाई परेशानी
रात के समय अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं होने को लेकर मरीजों के परिजन पहले से परेशान थे। इसी बीच लिफ्ट के खराब रहने की समस्या सामने आने से मुश्किलें और बढ़ गईं। परिजनों का कहना है कि गंभीर मरीजों को ऊपरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन को सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। लिफ्ट के बंद रहने से मरीजों को समय पर संबंधित वार्ड तक पहुंचाने में भी दिक्कत हो सकती है।

DC के निर्देशों के बावजूद व्यवस्था पर सवाल
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर उपायुक्त हेमंत सती भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते रहे हैं। इसके बावजूद अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जगह पर लिफ्ट के लंबे समय तक बंद रहने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से लिफ्ट की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक लिफ्ट चालू नहीं होती, तब तक गंभीर मरीजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए जाने चाहिए।
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मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठी चिंता
इलाज के साथ अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं। लिफ्ट बंद रहने की स्थिति में गंभीर मरीजों को सीढ़ियों से ले जाना न सिर्फ परेशानी भरा है, बल्कि गिरने या चोट लगने का खतरा भी बढ़ा सकता है। अब मरीजों और परिजनों की नजर अस्पताल प्रबंधन की ओर से लिफ्ट को दुरुस्त कराने और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने पर है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

