Samachar Post रिपोर्टर, गोड्डा : केंद्र और राज्य सरकार की आवास योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन गोड्डा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां योजना की सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद एक गरीब परिवार आज भी जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। परिवार का आरोप है कि पात्र लाभुक होने के बावजूद उसे अब तक आवास योजना का लाभ नहीं मिला। इसके कारण वह बरसात के मौसम में भी टपकती छत और असुरक्षित घर में जीवन बिताने को विवश है।
मोहनपुर मारखन पंचायत से सामने आया मामला
मामला गोड्डा जिले के मोहनपुर मारखन पंचायत का बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित परिवार का नाम आवास योजना की सूची में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद उसे पक्का मकान उपलब्ध नहीं कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर लापरवाही और अनदेखी के कारण वास्तविक जरूरतमंद परिवार सरकारी योजना के लाभ से वंचित रह गया है। वहीं परिवार का दावा है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
परिवार जिस कच्चे मकान में रह रहा है, उसकी स्थिति काफी जर्जर बताई जा रही है। बारिश होने पर छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे घर के भीतर रहना मुश्किल हो जाता है। परिजनों के अनुसार, बरसात की रातें भय और असुरक्षा के बीच गुजरती हैं। घर में पानी भरने और दीवारों के कमजोर होने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि आवास योजना का लाभ कई ऐसे लोगों को मिला है, जिनके पास पहले से पक्का मकान या आय के पर्याप्त साधन मौजूद हैं। वहीं वास्तविक जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पात्र लाभुकों की पहचान और चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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अधिकारियों के चक्कर लगाकर भी नहीं मिली राहत
पीड़ित परिवार का कहना है कि उसने कई बार प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारियों से संपर्क कर अपनी समस्या रखी, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन मामले की जांच कर जल्द आवास योजना का लाभ उपलब्ध कराएगा। यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर पात्र परिवार को जल्द आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

