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बिरसा मुंडा चिड़ियाघर में मांस सप्लाई में बड़ा घोटाला! शेर-बाघ को बिना वैध लाइसेंस के खिलाया जा रहा मांस

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Samachar Post रिपोर्टर, रांची :राजधानी के बिरसा मुंडा चिड़ियाघर में शेर, बाघ समेत अन्य मांसाहारी जानवरों के लिए रोजाना करीब 1.5 क्विंटल भैंस का मांस सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन इस सप्लाई में भारी गड़बड़ी सामने आई है। दरअसल, फिलहाल किसी भी सप्लायर के पास भैंस का मांस काटने या सप्लाई करने का वैध लाइसेंस नहीं है।

टेंडर की अवधि खत्म, फिर भी जारी सप्लाई

चिड़ियाघर में मांस सप्लाई के लिए जारी किया गया टेंडर खत्म हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद पुराने सप्लायरों से ही मांस की आपूर्ति की जा रही है। बताया जा रहा है कि बिना नए टेंडर के तिकड़मबाजी कर पुराने सप्लायर को ही काम जारी रखने दिया गया।

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बिना FSSAI और निगम लाइसेंस के जारी सप्लाई

नियमों के मुताबिक चिड़ियाघर के लिए मांस सप्लाई करने वाले के पास Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) का रजिस्ट्रेशन और रांची नगर निगम का वैध लाइसेंस होना जरूरी है। नगर निगम सूत्रों के अनुसार, इस समय किसी भी कंपनी को भैंस का मांस काटने या सप्लाई करने की अनुमति नहीं दी गई है। पहले M/S Arsh and Elham Live Stock Exporters (Ranchi) और M/S Micro Transmission System (Noida) के जॉइंट वेंचर को निगम ने अनुमति दी थी, लेकिन उनका लाइसेंस भी काफी पहले खत्म हो गया। तब से अब तक निगम की ओर से किसी नए सप्लायर को अनुमति नहीं दी गई है।

चिड़ियाघर के जानवरों को रोज कितनी मिलती है मांस की मात्रा

जानवर (Animal)लिंग (Gender)प्रतिदिन मांस की मात्रा (Quantity per Day)
TigerMale8 Kg
TigerFemale6 Kg
LionMale6.75 Kg
LionFemale5 Kg
LeopardMale2.5 Kg
LeopardFemale2 Kg
JackalFemale750 gm
Wolf–1 Kg

चिड़ियाघर में शेर, बाघ, चीता, भेड़िया और सियार समेत करीब 25 से ज्यादा मांसाहारी जानवर हैं। इन सभी को औसतन 1.5 क्विंटल भैंस का मांस प्रतिदिन दिया जाता है। जानवरों की उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर मात्रा में थोड़े-बहुत बदलाव किए जाते हैं, जबकि सप्ताह में एक दिन उपवास भी रखा जाता है।

नया टेंडर क्यों नहीं हुआ जारी?

जानकारी के मुताबिक, पिछले साल जारी किए गए टेंडर की अवधि खत्म होने के बाद नया टेंडर जारी किया गया था, लेकिन उसमें सिर्फ दो सप्लायरों ने हिस्सा लिया, जिसके कारण उसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद विभाग ने पुराने सप्लायर को ही फिर से सप्लाई का काम दे दिया, और जानबूझकर नया टेंडर जारी नहीं किया गया।

सवाल उठे

  • क्या चिड़ियाघर प्रशासन नियमों को ताक पर रखकर पुरानी व्यवस्था चला रहा है?
  • बिना लाइसेंस के मांस सप्लाई कैसे हो रही है?
  • क्या इससे जानवरों के स्वास्थ्य पर खतरा है?
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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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