Samachar Post डेस्क, पटना : बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत एजेंसी ने करीब 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। ये संपत्तियां मुख्य आरोपी कौशिक कुमार कर के स्वामित्व वाली कंपनी एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज हैं। ईडी को संदेह है कि परीक्षा के प्रश्नपत्रों की छपाई के लिए मिले सरकारी ठेके की अग्रिम राशि का एक हिस्सा फर्जी कंपनियों के जरिए दूसरी जगह भेजा गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इसी रकम से संपत्तियां खरीदी गईं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी मिला प्रश्नपत्र छपाई का ठेका
यह मामला बिहार केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने से जुड़ा है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की थी। पेपर लीक के कारण भर्ती परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। ईडी की जांच में आरोप है कि कौशिक कुमार कर की कंपनी ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड को पहले प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों में कथित संलिप्तता के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्रों की छपाई का ठेका कथित तौर पर कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से हासिल किया गया।

5.9 करोड़ रुपये के एडवांस में हेराफेरी का आरोप
ईडी के मुताबिक, प्रश्नपत्रों की छपाई के लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को करीब 5.9 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस रकम में से 2.01 करोड़ रुपये अलग-अलग शेल कंपनियों के माध्यम से डायवर्ट किए गए। एजेंसी को आशंका है कि लेनदेन के वास्तविक स्रोत और पहचान छिपाने के लिए रकम को कई माध्यमों से स्थानांतरित किया गया। बाद में इसी पैसे से अचल संपत्तियां खरीदी गईं। इसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी पांच संपत्तियों को ईडी ने अस्थायी रूप से जब्त किया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। अस्थायी जब्ती के बाद संपत्तियों को लेकर आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

















