CM सम्राट चौधरी ने शुरू किया ‘सहयोग कार्यक्रम’, अब हर महीने जनता से करेंगे सीधा संवाद

Rupa Kumari | July 14, 2026 | 01:30 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, पटना : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को राज्य स्तरीय ‘सहयोग कार्यक्रम’ की शुरुआत की। इस नई पहल के तहत आम नागरिक अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रख सकेंगे। कार्यक्रम का आयोजन मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में किया जा रहा है, जहां पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दरबार के माध्यम से लोगों की समस्याएं सुनते थे।

जनता और सरकार के बीच बनेगा सीधा संवाद

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि कई बार जिला और स्थानीय स्तर पर लोगों की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हो पाता, जिससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में अब लोगों को सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर मिलेगा।उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासन को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाना है, ताकि लोगों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे वरिष्ठ अधिकारी

‘सहयोग कार्यक्रम’ के दौरान विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। इससे शिकायतों और समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दे सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी और लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

हर महीने के दूसरे मंगलवार को होगा आयोजन

राज्य सरकार के अनुसार, ‘सहयोग कार्यक्रम’ का आयोजन प्रत्येक महीने के दूसरे मंगलवार को किया जाएगा। यह पहल प्रशासन और जनता के बीच सीधे संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान होगा और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।

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शिकायत निवारण व्यवस्था को मिलेगा बल

‘सहयोग कार्यक्रम’ के जरिए सरकार शिकायत निवारण तंत्र को और प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही है। इससे न केवल जनता की समस्याओं को उच्च स्तर पर सुना जाएगा, बल्कि विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कार्यक्रम का नियमित और प्रभावी संचालन हुआ तो यह राज्य में सुशासन और जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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