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झारखंडियों और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को लेकर आमया संगठन ने सीएम को सौंपा मांगपत्र, हेमंत सोरेन बोले जल्द होगा समाधान

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Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंडियों और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को लेकर आमया संगठन का प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिला। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को सौंपे गए मांगपत्र में संगठन ने स्थानीय युवाओं, उर्दू शिक्षा, धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यक समुदाय की उपेक्षा से जुड़ी कई समस्याओं पर ध्यान दिलाया।

स्थानीय नीति और आरक्षण को लेकर चिंता

संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष एस. अली ने मुख्यमंत्री को बताया कि झारखंड में स्थानीय नीति के अभाव का फायदा बाहरी अभ्यर्थियों को मिल रहा है, जिससे राज्य के युवाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने जिलावार नियुक्तियों में पिछड़े वर्ग को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग की।

JSSC और मदरसा शिक्षा से जुड़ी शिकायतें

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि JSSC की सहायक आचार्य (भाषा) भर्ती में आलिम डिग्रीधारकों का परिणाम अब तक जारी नहीं हुआ है। वहीं, फाजिल डिग्रीधारकों को माध्यमिक आचार्य भर्ती में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा, मदरसा आलिम-फाजिल परीक्षाएं रांची विश्वविद्यालय के माध्यम से आयोजित न होने से छात्रों का भविष्य अधर में बताया गया।

मॉब लिंचिंग बिल और गोलीकांड का मुद्दा

आमया संगठन ने मांगपत्र में कहा कि Mob Lynching Bill 2021 को अब तक लागू नहीं किया गया है, जिसके चलते ऐसी घटनाओं में वृद्धि हो रही है। 10 जून 2022 के रांची गोलीकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दिन दर्ज एफआईआर को वापस नहीं लिया गया और गोली चलाने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई।

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उर्दू शिक्षा और धार्मिक स्थलों की बहाली की मांग

संगठन ने कहा कि राज्य के 3712 उर्दू शिक्षक पद TET पास अभ्यर्थियों से भरने के बजाय सहायक आचार्य में समायोजित कर दिए गए। इसी तरह 544 उर्दू स्कूलों का स्टेटस बहाल नहीं किया गया और उर्दू एकेडमी का गठन भी अब तक लंबित है।
साथ ही, अल्पसंख्यक कोचिंग योजना को तुरंत शुरू करने की मांग उठी, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सहारा मिल सके।

बांग्ला भाषी मुस्लिमों और परंपरागत व्यवसायों की अनदेखी

मांगपत्र में कहा गया कि राज्य में बांग्ला भाषी झारखंडी मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव हो रहा है। भैंस वंशी पशुओं के वध की अनुमति नहीं मिलने, बुनकरों और टेलरिंग समितियों को सरकारी कार्यों में स्थान न देने और मुस्लिम धार्मिक स्थलों को भूमि पट्टा न मिलने पर भी आपत्ति जताई गई।

मुख्यमंत्री का आश्वासन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सभी मुद्दों को संवेदनशीलता से संज्ञान में लिया गया है और जल्द ही इन पर उचित समाधान किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के कई पदाधिकारी शामिल रहे, जिनमें लतीफ आलम, जियाउद्दीन अंसारी, मो. फुरकान, इमरान अंसारी, नौशाद आलम, रहमतुल्लाह अंसारी, एकराम हुसैन, औरंगजेब आलम, अब्दुल गफ्फार, अलाउद्दीन अंसारी, सफदर सुल्तान, अरशद जिया, अफजल खान और मो. अब्दुल्लाह शामिल थे।

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Rupa Kumari

Reporter | Samachar Postमैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।See Profile

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