सीयूजे में दो सप्ताह का आईसीएसएसआर प्रायोजित क्षमता विकास कार्यक्रम का उद्घाटन

Rupa Kumari | December 2, 2025 | 11:38 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : सीयूजे के शिक्षा विभाग और अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आईसीएसएसआर प्रायोजित दो सप्ताह का सामाजिक विज्ञान में मात्रात्मक एवं गुणात्मक शोध प्राविधि पर कैपेसिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आज औपचारिक उद्घाटन हुआ। यह कार्यक्रम 01 दिसंबर 2025 से 13 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन अवसर पर प्रो. संतोष कुमार पंडा, पूर्व चेयरमैन एनसीटीई एवं राष्ट्रीय फैलो एनआईईपीए, प्रो. सी बी शर्मा, कुलपति विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग, प्रो. के बी दास, कुलपति सीयूजे भी मौजूद थे।

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प्रमुख वक्ताओं के विचार

प्रो. सी बी शर्मा ने एनईपी के कार्यान्वयन और पॉलिसी एवं योजना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सही सवाल पूछना शोध को सशक्त बनाता है और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में फंडिंग बढ़ानी चाहिए। उनका मानना है कि एक अच्छा विचार समाज को बदल सकता है, और शोध के माध्यम से देश के विकास में योगदान दिया जा सकता है। प्रो. संतोष कुमार पंडा ने कहा कि भारत में सामाजिक विज्ञान शोध अभी भी कमजोर है और इसे मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने एनईपी के मुख्य बिंदुओं को अपनाने और अकादमिक विश्वसनीयता बनाए रखने की बात कही।

प्रो. क्षिति भूषण दास, कुलपति, सीयूजे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि शिक्षा में शोध अत्यंत आवश्यक है। शोध के माध्यम से विश्वविद्यालय ने पिछले वर्षों में कई करोड़ के परियोजनाओं के जरिए समाज और विश्वविद्यालय दोनों में सुधार किया है। उन्होंने प्रतिभागियों को स्वयं अनुभव और अवलोकन के नजरिए से शोध करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम संरचना और प्रतिभागी

कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. तपन कुमार बसंतिया ने बताया कि कार्यक्रम में भारत के 13 राज्यों से 35 प्रतिभागियों को चुना गया है, जबकि कुल आवेदन 110 प्राप्त हुए थे। सह संयोजक डॉ संहिता सुचरिता भी कार्यक्रम में उपस्थित रही।

उद्घाटन समारोह की प्रमुख गतिविधियाँ

सभी अतिथियों का स्वागत कुलसचिव, श्री के कोसल राव ने किया। प्रो. विमल किशोर, शिक्षा विभागाध्यक्ष, ने सभी अतिथियों से परिचय कराया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों को विश्वविद्यालय द्वारा अंगवस्त्र और स्मारिका देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसे डॉ शिव कुमार के नेतृत्व में कला संकाय के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया। इसके बाद विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया।

धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा विभाग की सह प्राध्यापक डॉ शशि सिंह ने दिया।

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