झारखंड संघर्ष, स्वाभिमान और सांस्कृतिक अस्मिता की भूमि : विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो

Rupa Kumari | November 22, 2025 | 05:14 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड विधानसभा की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक यात्रा पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर 2000 को शुरू हुई झारखंड राज्य की यात्रा आज 25 वर्षों के महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच चुकी है। यह सिर्फ प्रशासनिक पहचान का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता के सशक्त होने का प्रतीक भी है।

झारखंड सिर्फ भूगोल नहीं, सभ्यता का साक्षी

महतो ने कहा कि झारखंड प्रागैतिहासिक काल से मानव सभ्यता के विकास का सहचर रहा है। हीरे और संसाधनों की चाह में हुए शोषण, जंगलों पर कब्जे और औपनिवेशिक उपेक्षा के बावजूद यहां के लोगों ने संघर्ष की मजबूत परंपरा कायम रखी संथाल हूल, बिरसा मुंडा की क्रांति, टाना भगत आंदोलन और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्षों ने झारखंड की परिकल्पना को वास्तविक रूप दिया।

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संस्कृति और संघर्ष, झारखंड की पहचान

स्पीकर ने कहा कि झारखंड की आत्मा इसकी संस्कृति में बसती है। सरहुल, करम और सोहराय जैसे पर्व जल-जंगल-ज़मीन से गहरे जुड़े हैं और झारखंडी पहचान को मजबूत बनाए रखते हैं। उन्होंने बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हो, फूलो-झानो, तिलका मांझी, नीलाम्बर-पीताम्बर, शेख भिखारी, टिकैत उमराव सिंह समेत अनेक जननायकों का स्मरण करते हुए कहा कि इनकी चेतना आज भी समाज को दिशा देती है। विशेष रूप से उन्होंने झारखंड आंदोलन के महानायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को नमन करते हुए कहा, उन्हें सिर्फ एक राजनेता कहना, उनके योगदान का संकुचन होगा।

अगली 25 साल की राह कैसी हो?

महतो ने विकास के अगले चरण के लिए राज्य की प्राथमिकताएँ भी साझा कीं, शिक्षा बच्चों को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाए, स्वास्थ्य दूरस्थ इलाकों तक समान पहुंच, रोजगार युवाओं को बेहतर अवसर, जनजातीय सांस्कृतिक संरक्षण पहचान और मजबूत हो, पर्यावरण संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित प्रकृति दे। उन्होंने कहा कि सड़क, उद्योग, आईटी, कृषि और पर्यावरणीय संरक्षण में संतुलित विकास से झारखंड को एक मॉडल राज्य बनाया जा सकता है।

नीति को राजनीति से ऊपर रखेंगे

समापन में स्पीकर ने कहा, हम दल से ऊपर उठकर राज्य के हित को प्राथमिकता देंगे और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेंगे।

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