रामराज्य की झलक दिखाता सिमडेगा का रामरेखा धाम महोत्सव संपन्न, लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत संगम

Rupa Kumari | November 8, 2025 | 01:09 PM IST
  • तीन दिवसीय महोत्सव में भक्ति और अनुशासन का अद्भुत मिश्रण

Samachar Post रिपोर्टर, सिमडेगा : सिमडेगा के रामरेखा धाम में आयोजित तीन दिवसीय राजकीय रामरेखा महोत्सव और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और आस्था के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव के दौरान अथाह भीड़ थी, लेकिन अव्यवस्था नहीं; थकान थी, पर शिकायत नहीं; घना अंधेरा था, पर डर नहीं यही आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही। पूरे आयोजन ने रामराज्य की झलक प्रस्तुत की, जहां हर व्यक्ति सहयोगी था और मर्यादा में रहकर भक्ति में लीन था। मेला समाप्त होने के बाद भी प्रभु श्रीराम की नगरी की पवित्रता बनी रही।

वानर सेना का प्रतीकात्मक दृश्य और रात में अद्भुत रोशनी

गुरुवार शाम जब भीड़ और वाहनों का शोर शांत हुआ, वानर सेना का एक झुंड धाम की ओर बढ़ता दिखाई दिया, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। रात्रि में वाहनों की लाइटें पहाड़ों की ढलानों पर झिलमिलाईं, और ड्रोन कैमरे से ली गई तस्वीरों में धाम और आसपास का क्षेत्र दूर-दूर तक रोशन दिखाई दिया।

कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने किया भव्य समागम

कार्तिक पूर्णिमा पर अनुमानित चार लाख से अधिक श्रद्धालु भगवान श्रीराम के दर्शन के लिए धाम पहुंचे। घने जंगलों और पहाड़ों के बीच इतने विशाल जनसमूह के बावजूद शांति और अनुशासन बना रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान नहीं, बल्कि भक्ति का तेज झलक रहा था। अनुशासन और संयम की यह मिसाल पूरे आयोजन में दिखाई दी।

यह भी पढ़ें: लोहरदगा में मेडिकल कॉलेज की मांग पर PMO का जवाब: रांची की निकटता कारण, प्रस्ताव पर रोक

उपायुक्त कंचन सिंह का संदेश: सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान

उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा, रामरेखा धाम केवल धार्मिक आस्था का स्थल नहीं, बल्कि सिमडेगा की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान है। भगवान श्रीराम के लोकमंगलकारी चरित्र की छाप इस धरती के कण-कण में है। बहुभाषिक, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक समाज के लोग इस आयोजन में एकजुटता का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि आने वाले वर्षों में धाम को झारखंड के प्रमुख तीर्थ पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।

महोत्सव: भक्ति, लोक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक

महोत्सव ने सिमडेगा को नई सांस्कृतिक पहचान दी और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान की। कुल मिलाकर, कार्तिक पूर्णिमा मेला 2025 भगवान श्रीराम की भक्ति, लोक परंपरा, अनुशासन और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक बन गया। यह आयोजन आने वाले वर्षों के लिए आदर्श और प्रेरणा का केंद्र साबित होगा।

Share this news

संबंधित खबरें