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झारखंड में 17 ब्लड बैंकों का लाइसेंस होगा रद्द, कई पर लगेगा ताला -स्वास्थ्य विभाग आज कोर्ट में सौंपेगा रिपोर्ट

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  • चाईबासा में थैलेसीमिया बच्चों के एचआईवी संक्रमण मामले के बाद कार्रवाई तेज, 10 ब्लड बैंक पाए गए पूरी तरह गैर-मानक

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद एचआईवी संक्रमण की पुष्टि के मामले ने पूरे राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को हिला कर रख दिया है। इस घटना के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से राज्यभर के ब्लड बैंकों की स्थिति और उनके संचालन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कमेटी से सभी ब्लड बैंकों का ऑडिट कर रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे मंगलवार को कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।

17 ब्लड बैंक बंद होंगे, 10 पर दोबारा खुलने की नहीं मिलेगी अनुमति

विभागीय सूत्रों के अनुसार, 17 ब्लड बैंकों का लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इनमें से 10 ब्लड बैंक पूरी तरह मानकों पर खरे नहीं उतरे न सुविधाएं हैं, न प्रशिक्षित स्टाफ, और न ही सुरक्षा मानकों का पालन। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इन 10 ब्लड बैंकों को किसी भी परिस्थिति में दोबारा संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं 7 ब्लड बैंक ऐसे पाए गए जिनमें आंशिक रूप से मानकों का पालन हो रहा था। विभाग ने इन्हें सुधार के लिए एक निश्चित समय सीमा देने का निर्णय लिया है। यदि ये संस्थान तय मानकों को पूरा करते हैं, तो इनका संचालन दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है।

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ब्लड बैंक संचालन के लिए नया एसओपी तैयार

इसी बीच, स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी सरकारी और निजी ब्लड बैंकों के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है। इसमें ब्लड बैंक की संरचना, जांच प्रक्रिया, मॉनिटरिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

  • हर तीन महीने में ब्लड बैंकों का निरीक्षण अनिवार्य होगा।
  • जांच के दौरान उपकरणों की स्थिति, रिकॉर्ड, और एसओपी अनुपालन की जांच की जाएगी।
  • ब्लड बैंक का न्यूनतम क्षेत्रफल 300 वर्गमीटर तय किया गया है, जबकि
  • कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट वाले बैंकों के लिए 350 वर्गमीटर, एफेरेसिस मशीन वाले बैंकों के लिए 360 वर्गमीटर क्षेत्रफल आवश्यक रहेगा।

अब ब्लड बैंक होंगे पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड

सरकार ने सभी ब्लड बैंकों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने का निर्देश दिया है ताकि संचालन पारदर्शी हो सके। रक्त जांच के लिए अब केवल एलाइजा या केमील्युमिनेसेंस पद्धति को ही मान्यता दी गई है। रैपिड किट जांच पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा, ताकि रक्त की गुणवत्ता और संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। स्वास्थ्य विभाग मंगलवार को एसओपी की प्रति और ऑडिट रिपोर्ट दोनों दस्तावेज हाईकोर्ट में दाखिल करेगा।

https://samacharpost.live/2025/11/jharkhand-blood-donation-drive-bone-marrow-transplant-at-sadar-hospital/
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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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