Samachar Post रिपोर्टर, रांची: पूर्णिमा साहू ने हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कोल्हान विश्वविद्यालय में कुड़माली भाषा के शैक्षणिक पद सृजित करने की मांग की है। यह मांग आदिवासी कुड़मि समाज केंद्रीय समिति की ओर से मिले ज्ञापन के आधार पर उठाई गई है। विधायक पूर्णिमा साहू ने अपने पत्र में कहा है कि कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के स्नातकोत्तर विभाग और विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं वर्षों से कुड़माली भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके बावजूद अब तक इस भाषा के लिए शैक्षणिक पदों का सृजन नहीं किया गया है, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
कुड़माली भाषा की अनदेखी पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले ही जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभिन्न भाषाओं में शैक्षणिक पद सृजित करने का निर्णय ले चुकी है। इसमें कुड़माली भाषा के लिए भी प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी। इसके बावजूद विभागीय संकल्प में कुड़माली भाषा के पदों का समुचित उल्लेख नहीं होना चिंता का विषय है।
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मातृभाषा आधारित शिक्षा पर दिया जोर
पूर्णिमा साहू ने अपने पत्र में कहा कि कुड़माली झारखंड की द्वितीय राजभाषा है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत मातृभाषा आधारित शिक्षा को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए कोल्हान विश्वविद्यालय और संबंधित महाविद्यालयों में कुड़माली भाषा के शैक्षणिक पदों का शीघ्र सृजन जरूरी है।
मुख्यमंत्री से जल्द कार्रवाई की मांग
विधायक ने मुख्यमंत्री से मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। इस पत्र की प्रतिलिपि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति को भी भेजी गई है।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।